घाघरा नदी रविवार शाम खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। नदी का जलस्तर बढ़ने से गायघाट दक्षिणी गांव के अस्तित्व पर फिर खतरा मंडराने लगा है। नदी की स्थिति को देखकर कुछ लोग अपने मकान को तोड़ना शुरू कर दिए।
नदी के बढ़ते जलस्तर और कटान के मद्देनजर एसडीएम ने बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांव में पहुंचकर लोगों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। घाघरा नदी का जलस्तर इस वर्ष चौथी बार बढ़ते हुए 79.100 मीटर पर पहुंच गया। हालांकि खतरे के निशान 79.850 मीटर से नदी का जलस्तर अभी 750 सेंटीमीटर नीचे है। फिर भी बाढ़ और कटान तेज होने से गायघाट दक्षिणी गांव पर खतरा बढ़ गया है।
ग्राम प्रधान बालेंद्र उर्फ पप्पू ने बताया कि नदी की कटान रामपाल निषाद और धर्मेंद्र निषाद के घर के करीब पहुंच चुकी है। कटान से मकान को खतरा बढ़ जाने के कारण इन लोगों ने र सुबह से अपने मकान को तोड़कर ईंट को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। नदी का पानी बढ़ते हुए गायघाट दक्षिणी, गुनवतिया, चकदहा, ढोल बजा, सियर कला, दौलतपुर, कंचनपुर आदि गांवों के चारों तरफ पहुंचने लगा है।
उधर, कटान से साधु की कुटी के पास से जाने वाली सड़क कटने के कगार पर पहुंच गई है। गांव वालों का कहना है की नदी का पानी इसी तरह बढ़ा तो जल्द ही गांव में पानी घुस जाएगा। एसडीएम डॉ. रविंद्र कुमार रविवार को गायघाट दक्षिणी और साधु की कुटी पर पहुंचकर स्थित का जायजा लिया।
एसडीएम ने गांव के लोगों से कहा कि राजस्व विभाग की टीम यहां पर लगातार बनी हुई है। किसी भी तरह की समस्या होने पर टीम के लोगों को तत्काल जानकारी दें। जिन लोगों का मकान नदी के किनारे है वह लोग बाढ़ राहत केंद्र तिघरा में चले जाएं। वहां पर खाने पीने व रहने की व्यवस्था कर दी गई है।
सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सतीश चंद ने बताया कि नदी का जलस्तर 79.100 मीटर पर पहुंच गया है। यदि इसी तरह बढ़ी तो 24 घंटे में नदी बिडहर घाट पर खतरा के निशान को पार कर सकती है। एमबीडी बांध पूरी तरह से सुरक्षित है।