धनघटा। घाघरा नदी की धारा को मोड़ने के प्रयास में दो करोड़ रुपये खर्च हो गए, लेकिन नदी की धारा अपने स्थान से जरा सा इधर से उधर नहीं हुई। इससे एक बार फिर धनघटा तहसील के कई गांवों में कटान और बाढ़ की आशंका प्रबल हो गई है।
घाघरा नदी की धारा एक दशक पहले आजमगढ़ और अंबेडकरनगर की सीमा में प्रवाहित होती थी। इससे संतकबीरनगर जिले में घाघरा नदी की बाढ़ से न के बराबर नुकसान हुआ करता था, लेकिन नदी के किनारे अवैध रूप से किया गया बालू खनन नदी की धारा को उत्तर की दिशा में मोड़ने में सहायक सिद्ध हुआ। इसका पहला असर वर्ष 2013 में पड़ा, जब नदी भिखारीपुर, तुरकौलिया, जगदीशपुर आंशिक गांव को अपने में समाहित करते हुए एमबीडी बांध को तुरकौलिया नायक गांव के पास तोड़ दी।
उसी के बाद से प्रतिवर्ष बरसात के समय नदी जिले के 37 गांव में बाढ़ से तबाही मचाते चली आ रही है। वर्ष 2020, 2021 और 2022 में नदी की कटान से गायघाट दक्षिणी गांव के 47 लोगों का मकान नेस्तनाबूद हो गया। पिछले वर्ष नदी ने एक बार फिर तुरकौलिया नायक गांव के पास एमबीडी बांध जबरदस्त दबाव बनाया। बांध के बचाव में सिंचाई विभाग को करीब एक महीने तक कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। पिछले वर्ष ही योजना बनी कि बिडहर घाट पुल से नदी की धारा को मोड़ दिया जाए, जिससे बाढ़ का खतरा कम हो सके।
धारा को मोड़ने के लिए जनवरी, फरवरी और मार्च में कार्य किया गया। मशीन के जरिये नदी की खोदाई का कार्य हुआ। जिस पर दो करोड़ रुपये से अधिक रकम खर्च होने की बात सिंचाई विभाग के लोग बता रहे हैं, लेकिन नदी की धारा अपने स्थान से जरा सा उत्तर से दक्षिण नहीं हुई।
ग्रामीण हरिराम, धीरेंद्र, रामप्रताप, रघुवर, रामदीन निषाद आदि का कहना है कि अवैध बालू खनन के कारण ही नदी की धारा उत्तर की दिशा में मुड़ी। उसके बाद छपरा मगरबी गांव के पास बालू खनन का ठेका शासन ने दे दिया। ठेकेदार पोकलैंड और जेसीबी मशीन से उत्तर की ही दिशा में बालू का अंधाधुंध खनन करा रहे हैं। जो नदी की धारा को इधर आने में सहायक सिद्ध हो रहा है। बिडहर घाट पर स्थित मंदिरों पर पिछले वर्ष कटान का खतरा उत्पन्न हो गया था। यहां भी कटान रोकने के लिए आधा अधूरा काम किया गया। अब जब मानसून दस्तक देने वाला है, तो नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी स्वभाविक है। इस वर्ष नदी और अधिक तबाही मचा सकती है।
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घाघरा नदी की धारा को मोड़ने के लिए नदी में कार्य करने की जिम्मेदारी एक प्राइवेट कंपनी को दी गई थी। कंपनी के लोगों ने काम किया। नदी की धारा में परिवर्तन हुआ कि नहीं इसकी जानकारी तो जलस्तर बढ़ने के बाद ही हो सकेगी। एमबीडी बांध का मरम्मत कार्य पूरा करा लिया गया है।
-सतीश चंद्र, सहायक अभियंता, सिंचाई