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तालीम हासिल करना ही सूफी साहब से मोहब्बत का सुबूत : मौलाना

Fri, 24 Oct 2025 11:21 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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अगया में उर्स ए निजामी के मौके पर कांफ्रेंस को संबोधित करते मौलाना -स्रोत आयोजक
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सेमरियावां। ब्लाॅक के अगया गांव में विश्व प्रसिद्ध सूफी हजरत निजामुद्दीन कादरी बरकाती रिजवी मुहद्दिस बस्तवी की खानकाह पर चल रहे दो दिवसीय तेरहवां सालाना उर्स-ए-निजामी अकीदत के साथ मनाया गया। शुक्रवार की सुबह में मजार पर कुल शरीफ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस दौरान हजारों अकीदतमंदों ने मजार पर फातेहा पढ़ कर मुल्क में अमन और शांति की दुआ मांगी।
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शुक्रवार सुबह आठ बजे सज्जादानशीन मौलाना हबीबुर्रहमान के नेतृत्व में हजारों अकीदतमंद एकत्रित हुए। इस दौरान सामूहिक रूप से लोगों ने फातेहा सलाम पढ़ा। अकीदतमंदों ने खुदा से अपनी समस्याओं के समाधान और मुल्क में अमन व शांति की दुआ मांगी। इससे पूर्व बृहस्पतिवार की रात में निजामी कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। इसमें देश विदेश से आए उलेमा ने जायरीन को संबोधित किया। सज्जादा नशीन मौलाना सुफी हबीबुर्रहमान रिजवी ने कहा कि तालीम ही कौम की तरक्की का पैमाना है। जो तालीम से दूर होता है, वह धीरे-धीरे अखलाकी गिरावट का शिकार हो जाता है। तालीम की कमी किसी कौम की रुसवाई का सबब बनती है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में मुस्लिम स्कॉलर्स ने ज्ञान की विभिन्न विधाओं में नवीन खोज की और महत्वपूर्ण किताबें लिखीं, लेकिन मुसलमानों का यह हाल है कि अपने बुजुर्गों की लिखी हुई किताबों से भी दूरी बना चुके हैं।
उन्हीं किताबों का अध्ययन कर और उनसे फायदा उठाकर यहूदी और ईसाई कौम के लोगों ने नए रिसर्च किए और आज तालीम याफ्ता कौमों में अग्रणी हैं। उन्होंने कहा कि खतीबुल बरहीन हजरत सूफी निजामुद्दीन पूरी जिंदगी स्वयं शिक्षा और शिक्षण कार्य से जुड़े रहे और लोगों को तालीम हासिल करने के लिए प्रेरित करते रहे। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि तालीम हासिल कर सूफी साहब से मोहब्बत का सुबूत दें।
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कार्यक्रम का संचालन मौलाना हबीबुर्रहमान निजामी और मौलाना शफीक निजामी ने किया। महासचिव मौलाना जियाउल मुस्तफा निजाम ने देश के कोने कोने से आए जायरीन व प्रशासन का शुक्रिया अदा किया।
इस दौरान कारी हबीबुर्रहमान मिस्बाही इंग्लैंड, मौलाना मुख्तारूल हसन बगदादी, मौलाना मसूद बरकाती, मुफ्ती सदरूल वरा मिस्बाही, मुस्ती जाहिद सलामी, मौलाना अख्तर कमाल, मौलाना साजिद आदि माैजूद रहे।
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