गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11:03 बजे से दोपहर 1:34 बजे तक
चित्रा और स्वाति नक्षत्र के साथ ही ब्रह्म योग में मनेगा गणपति का जन्मोत्सव
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। प्रथम पूज्य श्रीगणेशजी का जन्मोत्सव सात सितंबर को मनाया जाएगा। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर घर-घर में भगवान गणेश का पूजन होगा, जबकि जिले के कई स्थानों पर मूर्ति का भी स्थापना की जाएगी।
चित्रा और स्वाति नक्षत्र के साथ ब्रह्म योग में भगवान गणेश के जन्मोत्सव के अनुष्ठान होंगे। वहीं, भक्तों को भगवान गणपति की मूर्ति स्थापना के लिए सुबह 11:03 बजे से दोपहर के 1:34 बजे तक यानी ढाई घंटे का मुहूर्त है। इसके साथ ही चौथ के चांद का दर्शन भी निषेध रहेगा। पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि सात सितंबर को पड़ रही है। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि छह सितंबर को दिन में 3:02 बजे लगेगी और सात सितंबर को शाम 5:38 बजे तक रहेगी। चित्रा नक्षत्र शुक्रवार को सुबह 9:25 बजे से सात सितंबर को दिन में 12:34 बजे तक रहेगा। इसके बाद स्वाति नक्षत्र लग जाएगा। मध्याह्न व्यापिनी चतुर्थी तिथि का मान सात सितंबर को होने से व्रत और उपवास इसी दिन रखे जाएंगे।
चंद्रदर्शन से लगता है मिथ्या कलंक
आचार्य अच्युत रामानुजाचार्य ने बताया कि गणेश पुराण के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन श्रीगणेशजी का प्राकट्य हुआ था। मध्याह्न के समय चतुर्थी तिथि के दिन जन्मोत्सव मनाने का विधान है। भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को ढेला चौथ या पत्थर चौथ के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि चतुर्थी को चंद्र दर्शन नहीं करना चाहिए। भूलवश चंद्र दर्शन हो भी जाए तो आरोप- प्रत्यारोप व मिथ्या कलंक लगने की आशंका रहती है। चंद्र दर्शन के दोष से शमन के लिए श्रीमद्भागवत पुराण के दशम स्कंध के 57 वें अध्याय में वर्णित स्यामंतकहरण के प्रसंग का कथन व श्रवण करना चाहिए।