संतकबीरनगर। विकास खंड हैंसर बाजार के ग्राम पंचायत मौर में बगैर प्रधान के हस्ताक्षर के मनरेगा के तहत कच्चे कार्य पर दो लाख से अधिक रुपये का भुगतान करा लिया गया है। इसकी शिकायत ग्राम प्रधान ने की, तो सोमवार को मनरेगा लोकपाल मौके पर जांच करने पहुंचे। जांच में प्रथम दृष्टया ग्राम पंचायत अधिकारी दोषी पाए गए हैं।
प्रधान कन्हैया लाल ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र दिया था कि उनके ग्राम पंचायत के सियर कला में एमबीडी बांध के एप्रोच का निर्माण कार्य कराया गया। इसकी जानकारी ग्राम प्रधान को नहीं हो सकी और न ही पत्रावली पर उनसे हस्ताक्षर करवाए गए। प्रधान का कहना है कि पहले तो बताया गया कि यह कार्य विधायक निधि से कराया जा रहा है, लेकिन उसका भुगतान ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत करा लिया गया।
प्रधान का कहना है कि भुगतान से पहले ब्लॉक अकाउंटेंट ने उनको जानकारी दी। तो उन्होंने भुगतान जांच पड़ताल के बाद करने को कहा। उसके बाद भी ब्लॉक के लोगों ने भुगतान कर दिया। प्रधान का आरोप है कि ग्राम पंचायत अधिकारी मनमाने तरीके से ग्राम पंचायत के धन का बंदरबांट कर रहे हैं। इसकी शिकायत कई बार ब्लॉक से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों से की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसी तरह ग्राम पंचायत रजनौली में बगैर कार्य के अमृत सरोवर का भुगतान लिए जाने की शिकायत की गई थी। उसकी भी जांच लोकपाल ने मौके पर पहुंच कर की।
मनरेगा लोकपाल पवन लाल ने बताया कि ग्राम पंचायत मौर में मनरेगा के तहत कराए गए कार्य व लिए गए भुगतान की पत्रावली और मस्टरोल पर प्रधान के हस्ताक्षर नहीं पाए गए हैें, जिससे इस मामले में प्रथम दृष्टया ग्राम पंचायत अधिकारी दोषी हैं। ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी समेत मनरेगा मजदूरों का बयान दर्ज कर लिया गया है। जांच रिपोर्ट अधिकारियों को दी जाएगी। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत रजनौली में अमृत सरोवर का कार्य कराया गया पाया गया। निर्माण कार्य अभी चल भी रहा है। जितना काम हुआ है उतना ही भुगतान लिया गया है।
उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता आदित्य राय का आरोप है कि शिकायत के बाद कार्य शुरू कराया गया है। कार्य शुरू कराने के पहले ही भुगतान ले लिया गया था।