फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sant Kabir Nagar News: सफेद रोटी के चक्कर में आटा महंगा, लोग हो रहे बीमार

Thu, 04 Apr 2024 12:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
विज्ञापन
विज्ञापन
- सेहत को पहुंच रहा नुकसान, आटे से चोकर निकालने से खत्म हो जाता है फाइबर
विज्ञापन

- बाजार में 40 से 42 रुपये किलो बिक रहा सफेद आटा

संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। आज कल लोग सफेद आटे की मांग ज्यादा कर रहे हैं। बाजार में लोग गेहूं पिसाने के बजाय रेडिमेड आटे की खरीद पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। यह आटा लोगाें की सेहत पर असर डाल रहा है। बाजार में इस आटे की कीमत प्रति किलो 40 से 42 रुपये तक है। इसमें फाइबर की मात्रा बहुत कम होती है, जबकि कार्बोहाइड्रेट बढ़ा रहता है। इससे लोगों का पाचन तंत्र खराब हो जा रहा है।
सफेद आटा पूरी तरह से रिफाइंड होता है। गेहूं पिसने के बाद उसमें से चोकर निकाल दिया जाता है, जिससे आटा पतला हो जाता है और सफेद दिखने लगता है। इस आटे में कार्बोहाइट्रेड बढ़ा रहता है। इसको खाने से लीवर पर असर डालता है। साथ ही पेट संबंधी बीमारी होती है। दस्त भी होने लगते हैं। इस समय लोगों के रहन-सहन और खानपान में बदलाव आ रहा है। कामकाज में व्यस्त लोग अब गेंहू पिसाने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं और वो रेडिमेड आटे पर जोर दे रहे हैं। इसमें चोकर की मात्रा नाम मात्र रहती है।
विज्ञापन

यही नहीं बाजार में दुकानदार मजबूरी का फायदा भी उठा रहे हैं। दुकानदारों ने आटे का दाम महंगा कर दिया है। फ्लोर मिल के संचालक ने बताया कि पहले गेहूं की छंटाई होती है, और उसके ऊपर की परत का छिल्का उतर जाता है। यही छिल्का चोकर होता है। इसके निकल जाने के बाद आटा अधिक सफेद हो जाता है।

बिचौलियों से खरीद रहे गेंहू
फ्लोर मिल संचालक आटे की पिसाई में बिचौलियों के जरिये गेंहू की खरीदारी कर रहे हैं। यह गेहूं उन्हें 22 से 23 रुपये किलो मिल जा रहा है। सफेद आटा बनाने के बाद यह 40 से 42 रुपये किलो के हिसाब से बिक रहा है। इससे मिल मालिक को काफी फायदा हो रहा है। वहीं किसानों से सीधे गेहूं की खरीद कर रहे हैं।

पेट व लीवर के लिए खराब है यह आटा
गेहूं पिसवाकर उसका आटा खाने से लाभ होता है। सरकार भी मोटे अनाज पर जोर दे रही है। सफेद आटा खाने से इसका सीधा असर लीवर पर पड़ता है। साथ ही पाचनतंत्र भी खराब हो जाता है। यह पूरी तरह से मैदे का बना होता है। अगर आप रोटी खा रहे हैं तो चोकर वाली खाएं। इससे पेट में बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ती है।
- डॉ. एपी मिश्रा, वरिष्ठ फिजीशियन, जिला अस्पताल

दो रुपये आटे की पिसाई है, इससे खर्च नहीं निकल रहा है। इसमें कॉमर्शियल बिजली का कनेक्शन लेना पड़ता है। पहले ज्यादा की संख्या में लोग आटा पिसाने आते थे, लेकिन अब दिन में 10 से 12 लोग ही आ रहे हैं। जिससे दुकान का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है।
विज्ञापन

- बालेंद्र उर्फ पप्पू, आटा चक्की संचालक

इस समय आटे की कीमत 40 से 42 रुपये तक है। पहले लोग गेंहू खरीद कर आटा पिसवाते थे, तब स्वास्थ्य बेहतर रहता था। लेकिन अब लोग रेडिमेड आटा खरीद रहे हैं। इससे काफी नुकसान हो रहा है। अब गेहूं की बिक्री कम हो गई है।
- सर्वदानंद पांडेय, अध्यक्ष, पूर्वांचल उद्योग व्यापार मंडल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें