- महुली क्षेत्र के गजाधरपुर गांव में देर रात हुई दुर्घटना, 12 मवेशी जिंदा जले, पड़ोसी की गुमटी और किराने का सामान भी राख
3 साइकिल और एक बाइक धू-धू कर जली
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। महुली क्षेत्र के गजाधरपुर (पोखरवा) गांव में सोमवार की रात करीब 11 बजे अज्ञात कारणों से रिहायशी झोपड़ी में आग लग गई। इसी दौरान झोपड़ी में रखा एक गैस सिलिंडर तेज धमाके के साथ फट गया और गांव में अफरा-तफरी मच गई। आग बुझाते समय एक युवक झुलस गया। वहीं आग की चपेट में आने से दस बकरियों, एक गाय और एक बछिया मौत हो गई। तीन साइकिल और एक बाइक जल गई।
गजाधरपुर (पोखरवा) निवासी शिव चंद्र पुत्र राम पलट गांव के किनारे झोपड़ी बनाकर मां शांति देवी, भाई सुभाष और बहन अर्चना के साथ रहते हैं। उन्होंने बकरी और गाय भी पाल रखी थी। शिव चंद्र के अनुसार सोमवार रात करीब 11 बजे अचानक झोपड़ी में आग लग गई। परिजन शोर मचाने के साथ सामान निकालने के प्रयास में जुटे थे लेकिन कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। दस बकरियों, एक गाय और एक बछिया ने झुलस कर दम तोड़ दिया।
झोपड़ी के पास रखी तीन साइकिल और एक धू-धू कर जल गई। कपड़ा, बर्तन, अनाज, भूसा आदि राख हो गया। आग की चपेट में गुमटी भी आ गई। उसमें रखा किराना का सामान और तीन हजार नकदी जल गया। आग बुझाने में शिव चंद्र के छोटे भाई सुभाष का हाथ झुलस गया।
गैंस सिलिंडर फटने से गांव में अफरा-तफरी
झोपड़ी में आग लगने से रसोई गैस सिलिंडर में विस्फोट हो गया। तेज धमाके की आवाज सुनकर गांव में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर वीरेंद्र त्रिपाठी और प्रधान प्रतिनिधि गजेंद्र त्रिपाठी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंच गए। राहत बचाव कार्य में ग्रामीणों के साथ जुट गए। बाद में अग्निशमन वाहन भी पहुंचा जिसकी मदद से आग बुझाई गई। मामले की जानकारी के बाद मंगलवार को हल्का लेखपाल ने नुकसान का आकलन किया और पशु चिकित्सक ने जानवरों का पोस्टमार्टम किया।
पल भर में राख हो गई जीवन भर की कमाई
- परिवार के पास खाने के लिए अनाज बचा न ही पहनने के लिए कपड़े
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। गजाधरपुर में रिहायशी झोपड़ी में लगी आग ने एक परिवार की जीवन भर की कमाई को पल भर में राख कर दिया। इस हादसे ने ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया।
गजाधरपुर निवासी शिव चंद्र को क्या पता था कि जिस तरह वह पाई-पाई इकट्ठा करके घरौंदा तैयार करके जीवन संवारने के लिए पशुओं को पाल रहे हैं, उस पर जल्द ही ग्रहण लगने वाला है। सोमवार रात हुए हादसे ने पूरे परिवार को चंद मिनट में ही सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया। बकरी और गाय पाल कर आर्थिक तंगी से उबरने के प्रयास में जुटे शिव चंद्र के बेहतर भविष्य के सपने पल भर में राख हो गए। परिवार की चीख-पुकार से हर कोई दुखी था। गरीबी का दंश झेल रहा परिवार आग लगने से बर्बादी के कगार पर खड़ा हो गया। आगजनी की घटना के बाद न तो परिवार के खाने के लिए अनाज बचा है और न ही पहनने के लिए कपड़े। परिवार का भरण-पोषण करना शिव चंद के सामने चुनौती बन गया है। गांव के लोगों ने प्रशासन से मदद की अपील की है।