मेंहदावल। नगर पंचायत में बने बीएमसीटी बाईपास सड़क के मुआवजे के लिए किसान अब हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गुहार लगाएंगे। उनका कहना है कि लोक निर्माण विभाग अभी तक मुआवजे के संबंध में कोई ठोस फैसला नहीं ले सका है। वह कभी मुआवजा देने की बात कहता है, तो कभी लोक निर्माण विभाग सिद्धार्थनगर के अधीन सड़क को बताकर अपनी जिम्मेदारी से बचना चाह रहा है। अधिकारियों की रोज की खींचतान व आश्वासन से तंग आकर किसानों ने अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का मन बना लिया है। अब खतौनी में दर्ज अपने नाम की भूमि के लिए मुआवजा मांगेंगे।
बता दें कि किसानों द्वारा अपर जिलाधिकारी राजस्व को मेंहदावल तहसील परिसर में घेराव कर मुआवजा से संबंधित ज्ञापन दिया गया था, जिसमें मेंहदावल बाईपास सड़क में अधिग्रहित भूमि के मुआवजे की मांग की थी। सड़क निर्माण में करीब पांच किलोमीटर के क्षेत्र के तकरीबन 600 किसानों की जमीन का मुआवजा अटका है। इस संबंध में किसान वेद कुमार पांडेय, जयचंद पांडेय, अविनाश सिंह, राजन, बबलू गोस्वामी, मनीष सिंह मन्नू, जितेंद्र पांडेय, आनंद पांडेय, उमेश पांडेय आदि ने पत्र दिया था।
उक्त पत्र के संबंध में अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग द्वारा जवाब देते हुए कहा गया है कि आवेदक द्वारा बस्ती-मेंहदावल-कैंपियरगंज-परतावल राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-328 के चौड़ीकरण व सुंदरीकरण का कार्य व 1991-92 में बनाए गए बाईपास सड़क का मुआवजा देने के संबंध में शिकायत की गई है। प्रकरण में अवगत कराना है कि बीएमसीटी मार्ग वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्ग खंड लोक निर्माण विभाग सिद्धार्थनगर के अधीन है।
इस संबंध में इस कार्यालय के पत्रांक संख्या 19189 एम, पांच मई के द्वारा प्रकरण में अग्रिम कार्रवाई हेतु अधिशासी अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग खंड लोक निर्माण विभाग सिद्धार्थनगर को पत्र प्रेषित किया गया है। अब सवाल उठता है कि जब बाईपास सड़क का निर्माण हुआ, तब यह लोक निर्माण विभाग बस्ती जनपद के अधीन था। उस समय यह सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित नहीं था। पांच सितंबर 1997 को बस्ती से अलग होकर संतकबीरनगर जनपद का गठन हुआ। जनपद बनने के बाद लोक निर्माण विभाग बस्ती से समस्त पत्रावली संतकबीरनगर प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग को स्थानांतरित कर दी गई। कई बार लोक निर्माण विभाग ने बाईपास सड़क की मरम्मत भी कराई। किसानों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग के अधिकारी गुमराह करने में लगे हुए हैं। इसको लेकर बाईपास सड़क मुआवजा संघर्ष समिति के लोगों ने नाराजगी जताई है। किसान अब हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं।
प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग तथा जिला प्रशासन किसानों को गुमराह कर रहा है। वर्ष 2016-17 में अपर जिला अधिकारी के सामने मुआवजा पीड़ित किसानों के बीच प्रशासन ने समझौता किया था, जिसमें लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे। अब जिम्मेदार पलटी मार रहे हैं। जिससे मजबूरन किसानों को हाईकोर्ट की शरण में जाना पड़ेगा।
-अवनींद्र जायसवाल, मेंहदावल
वर्ष 1991- 92 में किसानों की भूमि पर बाईपास सड़क का निर्माण कराया गया, लेकिन मुआवजा नहीं मिला। किसान मुआवजे के लिए संघर्ष कर रहे हैं। प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग को 3 करोड़ 84 लख रुपये मुआवजे के लिए कुछ वर्ष पहले मिला भी था, लेकिन आज तक किसानों का मुआवजा नहीं मिला। अब हाईकोर्ट में सड़क नहीं अपनी जमीन की लड़ाई लड़ेंगे।
-ब्रह्मदेव पांडेय, मेंहदावल
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सरकारी अफसर अभी तक मुआवजा देने की बात कह रहे थे अब लोक निर्माण विभाग इस मामले में सिद्धार्थनगर के राष्ट्रीय राजमार्ग खंड से मुआवजा लेने की बात कर रहा है, जो पूरी तरह गलत है। किसान बाईपास सड़क निर्माण में गई भूमि का मुआवजा मांग रहे हैं। अधिकारी जिला प्रशासन तथा किसानों को गुमराह कर रहे हैं।
-राजेश सिंह, मेंहदावल
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किसान 1993 से संघर्ष कर रहे हैं। आज तक उचित मुआवजा नहीं मिला। राष्ट्रीय राजमार्ग खंड बस्ती ने प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग को पत्र भी जारी किया। किसानों से कहा भी की यह मुआवजा की धनराशि प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग संत कबीर नगर से मिलना है। अब किसान हाईकोर्ट के माध्यम से अपना हक प्राप्त करेंगे।
-दीपक भारती, मेंहदावल
कोट
बाईपास सड़क निर्माण में मुआवजा संबंधी कोई प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं है। मुआवजे का मामला लंबित है तो उच्चाधिकारियों से वार्ता कर उचित कार्रवाई कराई जाएगी।
-अरुण कुमार, एसडीएम, मेंहदावल