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खता प्रशासन की और सजा भुगत रहे किसान

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धनघटा तहसील का भवन। - फोटो : KHALILABAD
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खता प्रशासन की और सजा भुगत रहे किसान
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धनघटा तहसील सृजन के बाद से ही छपरा मगर्वी व चपरा पूर्वी के अभिलेख का पता नहीं
संतकबीरनगर। करीब 25 वर्ष से अधिक का समय बीत गया, लेकिन धनघटा तहसील क्षेत्र के छपरा मगर्वी व चपरा पूर्वी के अभिलेख का पता नहीं चला। लिहाजा इन गांवों की खतौनी कंप्यूटरीकृत नहीं हो पाईं। जमीन का खारिज दाखिला व वरासत भी नहीं हो पा रहा। दोनों गांवों के दो हजार से अधिक किसान पीएम सम्मान निधि योजना से वंचित हैं। डीएम व एडीएम से लेकर संपूर्ण समाधान दिवस में मामला पहुंच चुका है, लेकिन समस्या जस की तस है।
विकास खंड पौली के छपरा मगर्वी गांव की प्रधान के पति देवेंद्र कुमार, लालचंद, जयराम, शंभू कुमार आदि ने बताया कि उनके गांव की आबादी 5,500 से अधिक है। वर्ष 1997 में संतकबीरनगर जनपद का सृजन हुआ। उसी के बाद धनघटा को तहसील का दर्जा मिला। धनघटा में तहसील मुख्यालय बनने के बाद से उनके गांव का मूल अभिलेख गायब है। मालिकाना व खतौनी रजिस्टर आदि नहीं मिल रहा है। आज तक कंप्यूटर में खतौनी फीड नहीं हो पाई।
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उन्होंने कहा कि काफी प्रयास हुआ तो लेखपाल ने आधी-अधूरी खतौनी तैयार की, लेकिन उसे कंप्यूटर में फीड नहीं किया गया। कंप्यूटर से खतौनी नहीं निकलने की वजह से गांव के करीब एक हजार किसान पीएम सम्मान निधि से वंचित हैं।
विकास खंड हैंसर बाजार के चपरा पूर्वी गांव के प्रधान हरिराम यादव, बाबूलाल, श्रीकांत, रामचेत ने बताया कि उनके गांव की आबादी करीब छह हजार है। उनके गांव का भी अभिलेख गायब है। प्रशासन की इस चूक का खामियाजा किसान उठा रहे हैं। आरोप है कि तहसील सृजन को 25 वर्ष बीत गए, लेकिन तहसील प्रशासन इस समस्या का समाधान नहीं कर सका।
धनघटा तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष लालशरण सिंह ने कहा कि छपरा मगर्वी और चपरा पूर्वी गांव के अभिलेख का पता नहीं है। दोनों गांवों के किसानों को कंप्यूटरीकृत खतौनी नहीं मिल पा रही है। कुछ किसानों को हाथ से बनी खतौनी लेखपाल उपलब्ध करा देते हैं। इस समस्या को लेकर कई बार किसान संपूर्ण समाधान दिवस में प्रार्थनापत्र दे चुके हैं, लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया। एसडीएम डॉ. रवींद्र कुमार ने बताया कि छपरा मगर्वी और चपरा पूर्वी गांवों के अभिलेख नए सिरे से तैयार करने के लिए डीएम ने राजस्व परिषद को पत्र भेजा है।
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कोट
विधानसभा धनघटा क्षेत्र के छपरा मगर्वी और चपरा पूर्वी गांव के अभिलेख तहसील से गायब होने की जानकारी मिली है। इस संबंध में डीएम, एडीएम और एसडीएम से वार्ता की गई है। राजस्व परिषद में पैरवी कर दोनों गांवों का नए सिरे से अभिलेख तैयार कराने का प्रयास करेंगे।
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- गणेश चंद्र चौहान, विधायक, धनघटा
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कोट
छपरा मगर्वी और चपरा पूर्वी के अभिलेख जीर्णशीर्ण हाल में है। इस वजह से खतौनी को कंप्यूटर में फीड कर पाना संभव नहीं हो पा रहा। राजस्व परिषद में पहल कर दोनों गांवों का रिकार्ड नए सिरे से तैयार कराया जाएगा, ताकि किसानों की समस्या का समाधान हो सके।
-मनोज कुमार सिंह, एडीएम
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