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खरीद एजेंसियों के लिए धान की गुणवत्ता सिरदर्द

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खरीद एजेंसियों के लिए धान की गुणवत्ता सिरदर्द
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धान की बिक्री के लिए एजेंसियों का चक्कर लगा रहे अन्नदाताओं की चिंता बढ़ी
बेमौसम बारिश से धान में कंडवा रोग लगने से फसल को हुई है क्षति
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिहरपुर। धान की गुणवत्ता को लेकर खरीद एजेंसियां किसानों का धान खरीदने में खुद को अक्षम महसूस कर रही हैं। वहीं, किसान अपनी तैयार फसल की उपज बेचने के लिए एजेंसियों का चक्कर लगा रहे हैं। ऐसे में धान न बिकने की वजह से किसानों की चिंता बढ़ गई है। फसलों के सहारे बुने किसानों के सपने प्राकृतिक आपदा की भेंट चढ़ गए हैं। ऊपर से गुणवत्ता का हवाला देकर खरीद एजेंसियां धान खरीदने में आनाकानी कर रही हैं जिससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। अब किसान अपनी उपज औने पौने दाम पर बिचौलियों के हाथ बेचने पर मजबूर हैं। रबी की फसल की बुआई के लिए खाद बीज का इंतजाम करने में किसानों के पसीने छूट रहे हैं। इस साल बेमौसम हुई बारिश से धान की फसलों में कंडवा रोग लग गया जिससे फसलों को काफी नुकसान हुआ। क्रय केंद्रों पर अपनी उपज बेचने के लिए क्रय केंद्र पर पहुंचे किसान रामप्रीत, हरिहर, अनिल कुमार, दयाराम ने बताया कि इस साल कंडवा रोग के कारण धान की फसल बुरी तरह से प्रभावित हुई है जिसके चलते क्रय केंद्र के जिम्मेदार धान की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा कर धान खरीदने से मना कर रहे हैं।
बीमारी की चपेट में आए धान खरीद को लेकर एजेंसियां भी असमंजस में हैं। उनका कहना है कि खराब गुणवत्ता वाले धान में मानक के अनुरूप चावल न मिलने से उसे खरीदने में दिक्कत हो रही है। सरयू-52 और गोल्डन मंसूरी प्रजाति के धान को छोड़कर अधिकतर धान की फसलें कंडवा बीमारी के कारण खराब हो गई हैं। जिसकी वजह से धान खरीद की रफ्तार भी सुस्त है।
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हरिहरपुर स्थित क्रय केंद्र के प्रभारी अजय प्रकाश सिंह ने बताया कि अब तक 600 क्ंिवटल धान की खरीदारी हो सकी है। किसानों के लाए धान के सैंपल में अधिकतर धान बीमारी से प्रभावित हैं जिससे धान की खरीद में परेशानी हो रही है। उनका कहना है कि किसान अपना धान साफ करके और सुखाकर केंद्र पर ले आएं।
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