संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तामेश्वरनाथ धाम काॉरिडोर बनाने की घोषणा के बाद से ही प्रशासन योजना को अंतिम रूप देने में जुटा है। डीएम आलोक कुमार ने तामेश्वरनाथ धाम परिसर में काश्तकारों व प्रभावितों होने वाले लोगों के साथ बैठक की।
काश्तकारों ने भूमि विक्रय पर आम सहमति दी गई। एसडीएम खलीलाबाद ने बताया है कि काश्तकारों से सहमति प्राप्त कर एक सप्ताह में पर्यटन निदेशालय को आगे की कार्रवाई करनी है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में यदि किसी काश्तकार को किसी प्रकार की आपत्ति या सुझाव हो तो संबंधित एसडीएम या जिलाधिकारी कार्यालय में एक सप्ताह के अंदर दे सकता है। मुख्यमंत्री ने 26 मई 2025 को तामेश्वरनाथ धाम भ्रमण के दौरान तामेश्वरनाथ धाम काॅरिडोर बनाने की घोषणा की थी। पर्यटन विभाग ने वर्ष 2025-26 की कार्ययोजना में इसको को अनुमोदित किया है। कार्यदायी संस्था सीएनडीएसएस जल निगम इकाई ने काॅरिडोर का प्रस्ताव वास्तुविद छत्रछाया आर्किटेक्चरल स्टूडियो लखनऊ के माध्यम से तैयार कराया। काॅरिडोर निर्माण के लिए राजस्व विभाग एवं वास्तुविद की ओर से आवश्यक भूमि का सर्वे किया गया है।
राजस्व विभाग व वास्तुविद के प्रारंभिक डिजाइन के अनुसार कुल 21,500 वर्ग मीटर भूमि की आवश्यकता है। उसके क्रम में 2346 हेक्टेयर जमीन चिह्नित कर ली गई है। काश्तकारों से क्रय की वाली भूमि 0.765 हेक्टेयर दो गाटों में है। इसमें काश्तकारों की संख्या 433 है।
कॉरिडोर में कुल पांच गाटे सरकारी भूमि, जिसका रकबा 1.581 हेक्टेयर है। पांचों गाटे सरकारी भूमि रविदास मंदिर राम जानकी मंदिर पोखरा के नाम अंकित है।
एसडीएम अरुण कुमार ने बताया कि राम जानकी मंदिर का कोई सरवराकार अभिलेख में दर्ज नहीं है तथा पूर्व से ही इन गाटों में राम जानकी मंदिर में पर्यटन विभाग की योजना के अंतर्गत निर्माण कार्य चल रहा है। सरकारी भूमि का पुनर्ग्रहण प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। निजी भूमि क्रय करने के लिए राजस्व टीम व काश्तकारों में बातचीत चल रही है।
इस दौरान एडीएम जय प्रकाश, एसडीएम खलीलाबाद अरुण कुमार, पर्यटन अधिकारी विकास नारायण सहित संबंधित राजस्व अधिकारी व कर्मचारी आदि उपस्थित रहे।