धनघटा/महुली। जाली नोटों के कारोबार में बस्ती जिले में दबोचे गए धनघटा थानाक्षेत्र के गागरगाड़ निवासी शिवकुमार कन्नौजिया और महुली थानाक्षेत्र के राजकुमार गुप्ता स्थानीय स्तर पर लोगों से सामान्य व्यवहार करते थे। उनके जाली नोटों के कारोबार में पकड़े जाने के बाद लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कारण यह था कि उनका जीवन लोकल स्तर पर पूरी तरह से सामान्य रहा है।
गागरगाड़ निवासी शिवकुमार (36) हाई स्कूल की पढ़ाई करने के बाद परिवार का खर्च चलाने के लिए तरह-तरह का व्यवसाय करने लगा। हालांकि उसका बड़ा भाई एक बैंक में कार्यरत है लेकिन दोनों भाई अलग-अलग रहते हैं। शिवकुमार के परिजन बताते हैं कि वह कौन सा काम इस समय कर रहे थे, इसकी जानकारी नहीं है। लेकिन इसके पहले वह गैस सिलिंडर की सप्लाई और कपड़े की दुकान कर चुके थे।
शिवकुमार 10 दिनों से घर से लापता था। वहीं बीच बस्ती की पुलिस उसे खोजते हुए घर आई थी। पुलिस से क्यों खोज रही है इसकी जानकारी परिवार के लोगों को नहीं हो पाई। अब जब शिवकुमार जेल चला गया तो इसकी जानकारी उसके परिवार के लोगों को हो चुकी है। उनके 80 वर्षीय उसके पिता फिरतू बताते हैं कि बेटा क्यों जेल चला गया इसकी जानकारी नहीं है।
वहीं महुली कस्बे के रहने वाला राजकुमार महुली में ही दक्षिण चौराहे पर मिठाई की दुकान खोला था। बाद में जमीन के मालिक ने वहां पर घर बनवा लिया तो उसकी दुकान बंद हो गई। इसके बाद वह शादी, जन्मदिवस तथा अन्य कार्यक्रमों में कैटरिंग का कार्य करने लगा था। उसके तीन बेटे और दो बेटियां भी हैं। इसमें एक बेटी की शादी हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो दोनों पिछले तीन साल से एक साथ ही रहते थे, लेकिन किसी को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि दोनों करते क्या हैं।
सूत्र तो यह भी बताते हैं कि दोनों मुंडेरवा में रहने वाले उचक्कों के संपर्क में आ गए थे। वह लोगों से ठगी करते थे, लेकिन अभी तक पकड़े नहीं गए थे। वे गड्डीबाजी के साथ ही सोने की गुल्ली देकर लोगों से रुपये ठगने जैसा शातिर काम करने लगे थे। फिलहाल उनकी गिरफ्तारी के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय स्तर पर उनका कोई गंभीर आपराधिक इतिहास भी नहीं है, जिसके चलते वह पुलिस की नजरों से बचे रहे। संवाद
दो माह पहले दुकानदार को हुआ था शक
नाम न छापने के शर्त पर एक दुकानदार ने बताया कि करीब दो पहले शिवकुमार और उसके साथ एक और व्यक्ति आए। कुछ सामान खरीदने के बाद 500 की नोट दिए। नोट असली न होकर संदिग्ध दिखाई दे रही थी। इसके बाद उस नोट को वापस कर दिया। इसके बाद शिवकुमार ने नोट वापस ले लिया और उसे दूसरी नोट दे दी। उसने इस बात को किसी से न कहने को कहा।