जन साहित्यिक मंच की कवि गोष्ठी के दौरान उपस्थित कवि । स्रोत - आयोजक
संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में रविवार को गोला बाजार स्थित एक हाल में मासिक कवि गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें कवियत्री डॉ. सोनी सिंह ने अपनी रचना युद्ध जीत भी जाना तो हे पार्थ तुम रहना सजग, धृतराष्ट्र सदा ही आएंगे गले लगाने...सुनाकर शुरूआत की। सीएल वर्मा रहबर मेंहदावली ने हमारी छोटी बड़ी हर अदा समझता है, हमारा दर्द हमारा खुदा समझता है, सुनाकर वाहवाही लूटी।
वहीं एहसास मगहरी ने तेरे हर रंग में ढलने की आरजू, लाई है मुझमें खौफ से लड़ने की आरजू, सुनाकर माहौल को रोमांटिक बना दिया। युवा शायर पवन श्रीवास्तव सबा ने नहीं है आरजू मेरी मुझे भगवान मिल जाए, मेरी चाहत है कोई भी भला इंसान मिल जाए, सुनाया जिसे सराहा गया। ओम प्रकाश गौतम ने गैर की पीर को पीर नहीं मानेंगे, एम ऐसे संत को कबीर नहीं मानेंगे, सुनाकर मानवीय दुखों को बताया। कवयित्री ज्योति सिंह अहसास ने मानव मरता है एक बार, पर मरते हृदय अनके बार, सुनाकर लोगों को जिंदा करने के लिए प्रेरित किया।
उस्ताद शायर महजर खलीलाबादी ने मोहब्बत मुझसे बेगाना नहीं है, अभी तक मुझको पहचाना नहीं है, सुनाकर गोष्ठी का ऊंचाई पर पहुंचाया। राधेश्याम मिश्र श्याम ने जीवन व्यतीत कर दिए जो सेवा भाव में, उन सबके श्याम आज कर्जदार हो गए, सुनाकर सेवाभाव के महत्व का बताया। सरदार हरिभजन सिंह भजन ने जुल्मों सितम के दौर में दम घुट रहा इंसान का, इंसानियत के नाम से इंंसां को दहशत आज है, सुनाकर बढ़ने जुल्म की ओर इशारा किया।
कवि गोष्ठी की अध्यक्षता नरसिंह नारायण कमल ने की। इस दौरान हामिद खलीलाबादी, सूरज कुमार कुंवर, छविराज, कैलाश चंद्र दूबे आदि ने अपनी रचना प्रस्तुत की।