संतकबीरनगर। कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के बैरमपुर निवासी ई-रिक्शा चालक अमन के लापता होने की गुत्थी अभी तक पुलिस सुलझा नहीं पाई है। वहीं महुली क्षेत्र में दो टुकड़ों में मिले शव की डीएनए रिपोर्ट 20 दिन बाद भी पुलिस को प्राप्त नहीं हुई है। जिससे इस बात की तस्दीक हो सके कि बरामद शव ई-रिक्शा चालक अमन का ही था। फिलहाल इस मामले में दो माह बीत जाने के बाद भी पुलिस टीम के हाथ खाली ही हैं।
कोतवाली खलीलाबाद के बैरमपुर गांव का निवासी ई-रिक्शा चालक अमन 10 फरवरी को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। उसका ई-रिक्शा महुली थानाक्षेत्र के गोड़ही गांव के पास 11 फरवरी को पाया गया था। इसके बाद पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की थी। वहीं इस मामले में 17 फरवरी को बैरमपुर गांव के ही चार लोगों के खिलाफ अमन के अपहरण का केस दर्ज किया गया था।
पुलिस अमन के लापता होने की गुत्थी सुलझाने में जुटी हुई थी। इस बीच 23 मार्च को महुली क्षेत्र में स्थित सरयू नहर से दो बोरों में एक शव पाया गया। इस शव की शिनाख्त अमन के परिवार के लोगों ने कपड़ों, जूतों तथा दांत के आधार पर अमन के रुप में की थी। इस शव के पोस्टमार्टम के दौरान परिवार के लोगाें के साथ ही राजनैतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया। मौके पर पहुंचकर एसपी ने लोगों को समझाया तथा मामले के पर्दाफाश की बात कही थी। इसके बाद मामला शांत हो पाया।
इस बात की तस्दीक करने के लिए कि वह शव अमन का ही है, पुलिस ने अमन के माता-पिता का डीएनए सैम्पल लेकर जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला को भेजा। प्रयोगशाला से अभी तक डीएनए मैचिंग की रिपोर्ट नहीं मिल पाई है। इसके लिए पुलिस प्रयोगशाला को रिमाइंडर भी भेज चुकी है। इस मामले के पर्दाफाश में जुटी चार टीमों में से सर्विलांस की टीम संदिग्ध मोबाइल नंबरों की छटाई में जुटी हुई है। साथ ही सीसीटीवी से भी पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग नहीं मिल सके हैं। सारा दारोमदार अब डीएनए जांच की रिपोर्ट पर ही टिका हुआ है।