संतकबीरनगर। विद्युत निगमों के निजीकरण व कर्मचारियों के उत्पीड़न के विरोध में बृहस्पतिवार को बिजली कर्मचारियों ने शहर में तिरंगा रैली निकाली। इस दौरान बिजली कर्मियों ने कहा कि निजीकरण उपभोक्ताओं व बिजली कर्मियों के हित में नहीं है। इसका प्रस्ताव वापस लिया जाए।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारी सुनील प्रजापति ने कहा है कि उत्तर प्रदेश विजन-2047 में बिजली व्यवस्था में लगातार हो रहे सुधार की चर्चा की जा रही है, ऐसे में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। संघर्ष समिति के पदाधिकारी आशीष कुमार ने निजीकरण के दस्तावेज के अनुसार निजीकरण के बाद भी प्रदेश सरकार को निजी कंपनियों को सस्ती दर पर बिजली मुहैया करानी पड़ेगी, जिसका भार सरकार उठाएगी।
ऐसे में सवाल यह है कि निजीकरण के ऐसे प्रयोग से प्रदेश को क्या मिलने वाला है। संघर्ष समिति के पदाधिकारी अशोक कुमार ने कहा कि बिजली कर्मियों का मुख्य उद्देश्य हर घर हर गांव तक सस्ती बिजली पहुंचाना है। बिजली कर्मी सीमित संसाधनों के बावजूद उपभोक्ताओं तक निर्बाध बिजली आपूर्ति का कार्य कर रहे हैं। विगत आठ वर्षों में लाइन हानियां 42 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत पर आ गयी हैं, जो राष्ट्रीय मापदंड है। ऐसे में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण करने का कोई औचित्य नहीं है।
इस दौरान इंजीनियर मुकेश गुप्ता, नारायण चंद्र चौरसिया, भास्कर पांडेय, मनोज यादव, धीरेंद्र यादव, श्रवण प्रजापति, विवेकानंद नायक, हरिप्रसाद, दिनेश शर्मा, सूरज प्रजापति, उमेश चौधरी, रंजन कुमार, मनीष मिश्रा, पुष्पेंद्र आदि मौजूद रहे।