संतकबीरनगर। विद्युत निगमों के निजीकरण के विरोध में शुक्रवार को बिजली कर्मियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना दिया। इस दौरान बिजली के निजीकरण के लिए लाए गए इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 एवं श्रम संहिता के विरोध में आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया।
कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारी ई. राजेश कुमार ने अति आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम 1966 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सरकार द्वारा हड़ताल पर प्रतिबंध लगाने के लिए एस्मा लगाए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि बिजली सेक्टर में पिछले 25 साल से लगातार एस्मा लगा हुआ है।
अब बिजली कर्मचारियों का समर्थन करने वाले राज्य कर्मचारियों, स्थानीय निकाय और निगमों के कर्मचारियों पर भी एस्मा लगा दिया गया है जो लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी आशुतोष कुमार ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से निवेदन किया है कि वह इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर संविदा कर्मियों की छटनी रोकने का निर्देश देने की कृपा करें। संघर्ष समिति ने बताया कि मई 2017 के आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में प्रत्येक विद्युत उपकेंद्र पर 36 कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्र में 20 कर्मचारी होनी चाहिए।
अब नए टेंडर के अनुसार इस आदेश के सर्वथा उल्लंघन में 48 प्रतिशत तक संविदा कर्मचारी हटाए जा रहे हैं। इस दौरान दिलीप सिंह, दुर्गा प्रसाद, सुनील प्रजापति, वीरेंद्र मौर्य, आशुतोष कुमार, रामलखन, अशोक कुमार, सूरज प्रजापति आदि मौजूद रहे।