संतकबीरनगर। विद्युत निगमों के निजीकरण के विरोध में शुक्रवार को भी बिजली कर्मियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना दिया। इस दौरान आरोप लगाया कि झूठे आंकड़ों के आधार पर प्रबंधन निजीकरण पर आमादा है। निजीकरण को लेकर उठाए जा रहे कदम के विरोध में बिजली कर्मियों ने पांच जुलाई को विरोध दिवस मनाने का एलान किया। अध्यक्षता कर रहे इंजीनियर मुकेश गुप्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बाद उपभोक्ताओं को मिलने वाले विशेष लाभ का विज्ञापन प्रकाशित कराया है। इससे बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं में भारी आक्रोश व्याप्त हो है। संघर्ष समिति ने पांच जुलाई को प्रांतव्यापी विरोध दिवस मनाने का एलान किया है। उन्होंने कहा कि निजीकरण का अंतिम फैसला करने से पहले संघर्ष समिति को अपना पक्ष रखने का मौका देना चाहिए।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी इंजीनियर राजेश कुमार ने कहा है कि पॉवर कारपोरेशन प्रबंधन ने विश्वसनीयता खो दी है। निजीकरण की प्रक्रिया किसी भी दशा में उपभोक्ताओं व बिजली कर्मियों के हित में नहीं है। संघर्ष समिति के पदाधिकारी अमित सिंह ने कहा कि पॉवर कारपोरेशन और शासन के कुछ बड़े अधिकारी, जिनकी निजी घरानों के साथ मिली भगत है वह लोग सरकार के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।
इस दौरान इंजीनियर मेराज अहमद, वागीश कुमार गुप्ता, केएन शुक्ला, केएल यादव, अभय सिंह, धनंजय सिंह, चंद्रभूषण, दिलीप सिंह, शैलेंद्र यादव, राघवेंद्र सिंह, सुनील कुमार प्रजापति आदि शामिल रहे।