संतकबीरनगर। विद्युत निगम के निजीकरण एवं कर्मियों के उत्पीड़न के विरोध में शुक्रवार को बिजली कर्मियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना दिया। इस दौरान बिजली कर्मियों ने निजीकरण का फैसला वापस लिए जाने की मांग किया।
विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति के पदाधिकारी दिलीप सिंह ने कहा कि साजिश के तहत विद्युत निगमों के निजीकरण का एकतरफा ऐलान कर ऊर्जा निगमों में अनावश्यक तौर पर औद्योगिक अशांति का वातावरण बना दिया है। जिसके चलते बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता 13 माह से लगातार आंदोलनरत हैं। संघर्ष समिति के पदाधिकारी अशोक कुमार ने कहा कि निजीकरण के नाम पर ट्रांजेक्शन कंसलटेंट नियुक्त किया गया और इस प्रक्रिया में करोड़ों रुपए खर्च किया गया। अवैध ढंग से नियुक्त ट्रांजेक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन द्वारा निजीकरण का आरएफपी डॉक्यूमेंट तैयार किया गया। इसी आरएफपी डॉक्यूमेंट को पॉवर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने उप्र विद्युत नियामक आयोग को भेजा, जिस पर विद्युत नियामक आयोग ने आपत्तियां दर्ज कर इसे पॉवर कॉरपोरेशन को वापस कर दिया। संघर्ष समिति के पदाधिकारी श्रवण प्रजापति ने कहा कि बिजली कर्मी आंदोलन के साथ उपभोक्ताओं की समस्याओं को सर्वोच्च प्राथमिकता पर अटेंड कर रहे हैं।
धरना में इंजीनियर मुकेश गुप्ता, सुनील प्रजापति, सूरज प्रजापति, धीरेंद्र यादव, उमेश चौधरी, मनोज यादव, रमेश प्रजापति, आशीष कुमार , भास्कर पांडेय, विजय कुमार, अमरनाथ यादव, दुर्गा प्रसाद आदि मौजूद रहे।