गांव के लोगों ने बताया कि 70 वर्षीय मोती लाल कसौधन पुत्र बिहारी की तबियत कुछ खराब थी। गुरुवार को वह गोरखपुर दवा कराने गए थे। दवा करा कर घर वापस आए थे।
लोगों ने बताया कि वह और उनकी पत्नी वह सतनामी साधु भी थे। उनके पास कोई औलाद नहीं है। कुछ लोग चर्चा कर रहे थे कि घटना देखने से ऐसा लग रहा है कि वह कमरे में पहले से लकड़ी जोड़ कर समाधि बनाए थे और उसी में लेट कर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा लिए।
जिससे उनकी मौत हो गई। प्रभारी एसओ प्रदीप कुमार ने बताया कि मोती लाल कसौधन का शव अभी जल रहा था। जिसे बुझाया गया, लेकिन शव लगभग जल चुका था।
पूछताछ में जो पता चला कि वृद्ध की पत्नी ने पूर्व में समाधि उसी घर में ली थी। उसने भी समाधि लेने की चर्चा कुछ लोगों से किया था।
घर मंदिर की तरह है,जिस पर सतनाम सदगुरु दरिया साहब भव्य,दिव्य ज्ञान मंदिर लिखा है। शमशान घाट पर जैसे शव को जलाए जाने की व्यवस्था रहती है,वैसी ही व्यवस्था घर में दिखी। लकड़ी की तिख्ती बना कर वृद्घ ने खुद आग लगा कर जान दी है।