संतकबीरनगर। सहालग में डीजे का शोर जानलेबा बन सकता है। कान फोड़ू आवाज से लोगों की धड़कने बढ़ने लग रही हैं। ब्लड प्रेशर व ह्रदय रोगियों की समस्या बढ़ रही है। सहालग में वाहनों पर लगे डीजे की आवाज से कान भी कुछ देर तक सुन्न हो जा रहा है। इससे लोग अनिद्रा के शिकार भी हो रहे हैं।
तेज ध्वनि के स्पीकर का शोर सेहत के लिए खतरनाक है। सड़क पर बजने वाले डीजे की गूंज से आसपास के घरों की खिड़कियां और दरवाजे तक हिल रहे हैं। कानफोड़ू आवाज सीधे आने पर कान के परदे भी कंपन करने लगते हैं। तीव्र गति की ध्वनि कमजोर दिल के लोगों की जान पर भी बन आती है। कुछ दिन पहले प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान डीजे की तेज आवाज से लोग परेशान थे।
अभी वह खत्म हुआ कि सहालग शुरू हो गया। लोगों का कहना है कि तेज धमक से बुजुर्ग, बच्चों व गर्भवती महिलाओं की भी बेचैनी बढ़ जाती है। प्रशासन को रोक लगानी चाहिए।
ये हैं मानक
डीजे की आवाज को लेकर मानक तय है। इसमें औद्योगिक क्षेत्र में दिन में 75 तो रात में 70 डेसिबल, वाणिज्यिक क्षेत्र में दिन में 65 डिसेबल और रात में 55 डिसेबल निर्धारित है। आवासीय क्षेत्र में दिन में 55 और रात में 45 डिसेबल होना चाहिए। इसका पालन जिले में कहीं नहीं हो रहा है।