जिला अस्पताल में मरीजों की लगी भीड़-संवाद
संतकबीरनगर। होली नजदीक है। बाजार तरह-तरह के रंगों से सज चुके हैं, लेकिन चिकित्सकों ने लोगों को सिंथेटिक और रासायनिक रंगों से सावधान रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि ऐसे रंग त्वचा, आंखों और श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
चार मार्च को लोग रंगों में सराबोर होंगे। पहले जहां होली फूलों और हर्बल रंगों से खेली जाती थी, वहीं अब बाजार में रासायनिक रंगों की भरमार है। ये रंग सस्ते और चटख हैं, लेकिन सेहत के लिए जोखिम भरे साबित हो सकते हैं। चिकित्सकों के अनुसार कई सिंथेटिक रंगों में लेड ऑक्साइड, क्रोमियम आयोडाइड, कॉपर सल्फेट, सीसा और एल्युमीनियम ब्रोमाइड जैसे रसायन पाए जाते हैं। इनके संपर्क में आने से त्वचा पर एलर्जी, जलन, आंखों में सूजन, संक्रमण और सांस संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। खासकर अस्थमा के मरीजों और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. एसबी गौतम ने बताया कि जिला अस्पताल में प्रतिदिन चेहरे पर दाने को लेकर 20 से 25 मरीज आते है। अब होली का पर्व है, ऐसे में केमिकलयुक्त रंगों से दूर रहना चाहिए। आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा लगाकर रंग खेलें। अगर आंख में रंग चला जाए तो तुरंत साफ पानी से धोएं और आंखों को रगड़े नहीं। परेशानी होने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें। उन्होंने कहा कि रंग खेलने से पहले शरीर पर नारियल तेल लगाएं और सिंथेटिक रंगों से बचें। यदि रंग से त्वचा पर जलन हो तो तुरंत साफ पानी से धो लें। समस्या अधिक होने पर चिकित्सक से संपर्क करें।