कवियोें ने बांधा समा, खचाखच भरा रहा ऑडिटोरियम, देर रात तक गूंजती रहीं तालियां
धनघटा। दोआबा महोत्सव में शनिवार की रात कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हजारों की तादाद में श्रोता पहुंचे और पूरा ऑडिटोरियम खचाखच भरा रहा। कवियों की रचनाओं पर दर्शकों ने ठहाके लगाए तो वीर रस की बयार में गोते भी लगाते दिखे। तालियों की गड़गड़ाहट से दर्शकों ने कविओं की रचनाओं का अभिनंदन किया। चेयर मैन रिंकू मणि, प्रतिनिधि नीलमणि व ईओ उमेश पासी ने कवियों का अभिवादन किया।
कवि सम्मेलन में मंच का संचालन कवि विकास बौखल ने किया। इसके अलावा उन्होंने कार्यक्रम में अपने हास्य-व्यंग्य की प्रस्तुति से दर्शकों को बांधे रखा। कवि सम्मेलन में बाराबंकी से आईं गीतकार व कवि साक्षी तिवारी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ‘स्वर पर सवार होके, कंठ का सिंगार होके...सुनाकर श्रोताओं ने कवियित्री का अभिवादन किया। वहीं श्रृंगार रस के गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं
कवि सलमान घोसवी की कविता ‘मिलकर सात रंगों को वफा का नाम लिखना, बरकते दिल जलाकर सारी नफरत को यहां खत्म करना’ प्रस्तुति सुन श्रोताओं ने ताली की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया। असद मेहताब की कविता ‘काम ऐसा करो आचरण के लिए, हक बना लो तिरंगा कफन के लिए’ ने खूब वाहवाही बटोरी।
इसके अलावा कवियित्री शैलजा की प्रस्तुति ‘बन सुगंधित हवन संग, खुशबू लिए कभी तुम प्यार करते हो, कभी तकरार करते हो, कैसी शरारत दिलदार करते हो’सुनाया। कवियों और गीतकारों की प्रस्तुति ने श्रोताओं को खूब झुमाया। गाजियाबाद से आए प्रख्यात कवि व गीतकार प्रियांशु गजेंद्र की गीत ‘जीवन कई रंगों में रंगा रंगों के व्यापार में रात भर तुमको गाया सुबह छपी अखबार में’ ने खूब शमा बांधा। उनके गाए गीत ‘पांव बेचकर सफर खरीदा सफर बेचकर राहें...श्रोताओं के दिलों को छू गई। सम्मेलन में ज्योति सिंह ने काव्य पाठ प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी।