संतकबीरनगर। बढ़ते मानसिक तनाव और बदलती जीवनशैली का असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी दिखाई दे रहा है। जिला अस्पताल में मानसिक, न्यूरो और नशा संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है। चिकित्सकों के अनुसार सिरदर्द, अधकपारी, मिर्गी, चक्कर, नसों में दर्द, हाथ-पैर में झनझनाहट और सुन्नपन जैसी समस्याओं के साथ चिंता, बेचैनी, नींद की कमी और व्यवहार में बदलाव की शिकायत लेकर भी मरीज पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के एमडी न्यूरो साइकियाट्री चिकित्सक डॉ. उमाशंकर ने बताया कि वर्तमान में प्रतिदिन करीब 50 से 60 मरीज मानसिक और न्यूरो संबंधी समस्याओं को लेकर उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। मरीजों की जांच के बाद आवश्यक उपचार और परामर्श दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि मानसिक रोगों के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग दिखाई दे सकते हैं। लगातार उदास रहना, घबराहट, बेचैनी और अत्यधिक चिंता, नींद कम आना, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा या चिड़चिड़ापन, असामान्य रूप से ज्यादा बोलना, व्यवहार में अचानक बदलाव, बेवजह डर लगना या किसी बात पर अत्यधिक शक करना इसके संकेत हो सकते हैं। कुछ मरीजों में एक ही बात बार-बार सोचने अथवा एक ही काम को बार-बार करने की प्रवृत्ति भी दिखाई देती है।
मिर्गी और न्यूरो संबंधी लक्षणों पर भी सावधानी जरूरी
डॉ. उमाशंकर ने बताया कि मिर्गी में झटके आना, बेहोशी या कुछ समय के लिए असामान्य गतिविधियां दिखाई देना जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा लंबे समय से सिरदर्द, अधकपारी, चक्कर, कमर या कंधे में दर्द, हाथ-पैर में झनझनाहट और सुन्नपन और सायटिका जैसी समस्याओं में भी चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कई बार लोग सामान्य शारीरिक कमजोरी, नींद की कमी या अन्य समस्या को नजरअंदाज करते रहते हैं। लंबे समय तक समस्या बने रहने पर चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है।
बच्चों में व्यवहार परिवर्तन को भी गंभीरता से लें
चिकित्सक ने बताया कि बच्चों में भी व्यवहार संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं। अत्यधिक मोबाइल देखने, टेलीविजन पर देखी गई चीजों की नकल करने, अचानक अजीब व्यवहार करने, छोटी-छोटी बातों पर अत्यधिक प्रतिक्रिया देने या नींद में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें तो अभिभावकों को इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।