संतकबीरनगर। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में अभी तक ईसीजी की सुविधा नहीं थी, जिससे मरीजों को बाहर से ईसीजी करानी पड़ती थी। सीएमएस की पहल पर इमरजेंसी में ईसीजी मशीन आ चुकी है। इसके लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की ईसीजी की जा सके। इमरजेंसी में ईसीजी के लिए प्रतिदिन सात से आठ मरीज आते है। ईसीजी होने से मरीजों को अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी से लगायत इमरजेंसी तक 1500 के करीब मरीज अपना इलाज कराते है। इसमे इमरजेंसी में प्रतिदिन 100 से 120 मरीज आते है। दिन में दो बजे अस्पताल की ओपीडी बंद हो जाती है तो लोग इमरजेंसी में ही इलाज के लिए जाते है। अगर हार्ट का कोई गंभीर मरीज है तो उसे ईसीजी की जरूरत पड़ती है। ईसीजी न होने के चलते मरीजों को बाहर से ईसीजी करानी पड़ती थी। उन्हें 100 रुपये से लेकर 150 रुपये तक खर्च करने पड़ते थे और परेशानी अलग से झेलनी पड़ती थी। सीएमएस ने इमरजेंसी में अब ईसीजी की व्यवस्था कर दी है। मशीन आ चुकी है और उसके संचालन के लिए एक स्वास्थ्य कर्मी को प्रशिक्षित किया गया है। यह स्वास्थ्य कर्मी अन्य को प्रशिक्षित करेंगे। जिससे मरीजों को बाहर ईसीजी के लिए न जाना पड़े। सीएमएस डॉ. भवनाथ पांडेय ने बताया कि इमरजेंसी में ईसीजी की व्यवस्था न होने के चलते मरीज को परेशानी हो रही है। इमरजेंसी में अब ईसीजी की व्यवस्था कर दी गई है। किसी भी मरीज को बाहर ईसीजी के लिए नहीं भेजा जाना चाहिए।इसके लिए इमरजेंसी में तैनात कर्मियों को सख्त हिदायत दी गई है।