पुरानी सब्जी मंडी में होली पर घर में गुझिया बनातीं महिलाएं।
संतकबीरनगर। लोग मिलावट के चलते घरों की गुझिया पर जोर दे रहे हैं। ज्यादातर महिलाएं घरों पर गुझिया बना रही हैं। महिलाओं का कहना है कि रेडिमेड गुझिया व पापड़ सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं। जिसकी वजह से घरों पर बनी गुझिया ही खाने लायक है। बताया कि पापड़ तो पहले ही बना लिया था।
बाजार में तरह-तरह की गुझिया आ गई हैं। इस गुझिया को बनाने में मिलावटखोर कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। होली में मैदा और खोया से बनी गुझिया लोगों के मुंह में पानी लाने के लिए काफी है। अगर इन पर्वों पर यह मिठाइयां खाने को न मिलीं तो मानो त्योहार अधूरा रह गया।
वहीं, भागदौड़ भरी जिंदगी में पकवानों को कैसे तैयार किया जाए यह समस्या लगभग हर घरों में रहती है, जिसे बाजार भी पहचान चुका है। ऐसे में शहर के लगभग सभी दुकानों में रेडिमेड गुझिया व पपड़िया बनकर तैयार हो चुकी हैं।
हालांकि इसमें मिलावट की आशंका रहती है। ऐसे में महिलाएं अब घर पर बनी गुझिया पर जोर दे रही हैं। वह दूध को जलाकर खोआ तैयार कर रही हैं और उसके बाद गुझिया बना रही हैं। गोला बाजार निवासी संगीता, टीचर्स काॅलोनी निवासी विंदू यादव ने बताया कि वह लोग घर पर ही गुझिया तैयार कर रहीं हैं।
बाजार की गुझिया पसंद नहीं आती है। घर की गुझिया चाहे जैसा तैयार कर लें। अगर मिठास ज्यादा चाहिए तो उसे बढ़ा सकते हैं। थोड़ी मेहनत तो लगती है पर बेहतर गुझिया तैयार हो जाती है।
बता दें कि जिले में दूध की खपत आठ हजार लीटर के करीब है। जो इस समय बढ़कर 12 हजार लीटर हो गई है। ऐसे में घर पर ही खोआ तैयार किया जा रहा है। किराना की दुकान चलाने वाले राधेश्याम ने बताया कि वह रोज 50 पैकेट दूध मंगाते थे। इस सम 150 पैकेट दूध की खपत हो जा रही है। घरों में ही खोआ और पनीर तैयार किया जा रहा है।