लल्ला, मजीद, अब्दुल गफफार, रफीक, मौलाना मोइनुद्दीन अंसारी, निसार, तुफैल ने बताया कि बखिरा, परतिया, गौरा, मलिकजोतवा, तरकुलवा, मदरहा, बूंदीपार समेत दर्जनों गावों का पानी पुलिया से होकर झील में चला जाता है।
गंदे पानी की निकासी के लिए कुल आठ पुलियां बनाई गई हैं, किंतु शिवचरन के आरा मशीन के निकट स्थित नाले पर पक्का निर्माण कार्य कराने से नाली पूरी तरह से बाधित हो गई है।
नतीजतन धीरे-धीरे दर्जनों गांवों का पानी ओवरफ्लो होकर सड़क पर फैलने लगा है। हालात ऐसे हैं कि अमरडोभा चौराहे से लगायत पीएचसी तक करीब 150 मीटर की लंबाई में विगत तीन दिनों से मुख्य मार्ग पर एक फीट की गहराई में जल जमाव है।
ग्रामीणों ने कहा कि सड़क पर लगे जल जमाव से आस पास रहने वालों के घरों में भी पानी घुसने लगा है। परिवार के लोगों का किसी काम से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
लोगों ने आशंका जताई है कि इसी प्रकार से समस्या बनी रही तो संक्रामक बीमारी भी फैल सकती है। ग्रामीणों ने कहा कि वैसे तो हर साल बरसात के दिनों में महीनों तक नाला जाम होने से जल जमाव के हालात रहते है।
समस्या समाधान के लिए दर्जनों आंदोलन किए गए। पीडब्लूडी समेत जिले के अधिकारियों से दर्जनों बार शिकायत की गई, किंतु महज आश्वासन व खाना पूर्ति के सिवाय कुछ भी नहीं किया जाता है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से नाला की समस्या के निदान के साथ ही पक्का नाला बनाए जाने की गुहार लगाई है, इससे दर्जनों गांवों के ग्रामीणों को बररसात से होने वाली जलजमाव की समस्या से निजात मिल सके।