दिवाली पर भी नहीं मिला पारिश्रमिक, छाई रही मायूसी
जिले में 2000 आशा कार्यकर्ता व 83 आशा संगिनी कार्यरत
संतकबीरनगर। स्वास्थ्य विभाग के फ्रंट लाइन वर्करों की दिवाली फीकी रही। कारण उनके पारिश्रमिक का भुगतान नहीं हो पाया। इससे उनमें मायूसी छाई रही।
जिले में 2000 आशा कार्यकर्ता व 83 आशा संगिनी कार्यरत हैं। शासन का निर्देश था कि दीपावली से पहले इनके बकाए पारिश्रमिक का भुगतान कर दिया जाए। इसके बाद भी विभागीय अधिकारियों की उदासीनता से पारिश्रमिक का भुगतान नहीं हो सका। तमाम कार्यकर्ता धनाभाव के कारण धनतेरस और दीपावली की खुशियां नहीं मना पाई। इससे उनमें आक्रोश व्याप्त है।
आशा कार्यकर्ताओं व आशा संगिनियों का विभिन्न ब्लॉकों में कहीं जुलाई से तो कहीं इससे पूर्व का मानदेय बकाया है। फायलेरिया, कुष्ठ व पोलियो अभियान, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का टीबीआई बकाया है। आशा संगिनी को वर्ष 2019 से ही प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना के लाभार्थियों के फार्म भरवाने के एवज में मिलने वाली धनराशि का भुगतान नहीं हो सका है। स्वास्थ्य विभाग के जिमेदार केवल आश्वासन ही बांट रहे हैं।
आशा कर्मचारी यूनियन की जिलाध्यक्ष सरोज यादव ने कहा कि काम के लिए लगातार दबाव डाला जा रहा है, लेकिन भुगतान के प्रति कोई गंभीर नहीं हैं। इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि जल्द सभी बकाए का भुगतान नहीं किया गया तो वृहद आंदोलन किया जाएगा।
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कोट
भुगतान की व्यवस्था बदलने से थोड़ी दिक्कत आई है। भुगतान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द सभी बकाए का भुगतान करा दिया जाएगा। ब्लॉक स्तर से होने वाले भुगतान के लिए बजट उपलब्ध कराया गया है। निर्देश दिए गए हैं कि जल्द से जल्द भुगतान करा दिया जाए।
डॉ. मोहन झा, अपर सीएमओ