स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मोहम्मद इस्माइल का पौत्र जुल्फिकार ठेले पर सब्जी बेचते हुए।संवाद ढ्?
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कठिन डगर में भी नहीं किया समझौता
आजादी के आंदोलन में मोहम्मद इस्माइल ने खोला था अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। देश की आजादी में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मोहम्मद इस्माइल ने भी अहम भूमिका निभाई है। कठिन डगर में भी समझौता नहीं किया। आजादी में उनके योगदान को लोग आज भी याद करते हैं।
मेंहदावल कस्बे के नगरवाली माता मंदिर के पास स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मोहम्मद इस्माइल का परिवार रहता है। उनका परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। सरकारी मदद के नाम पर सिर्फ प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है। मोहम्मद इस्माइल के पौत्र जुल्फिकार सब्जी बेचकर परिवार का खर्च चलाते हैं।
उन्होंने बताया कि बाबा मोहम्मद इस्माइल के आजादी के आंदोलन की कहानी लोगों की जुबानी सुनने को मिलती है। मिश्र बंधुओं के साथ उनके बाबा ने भी अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मोहम्मद इस्माइल को अंग्रेजों ने आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने पर नैनी जेल भेज दिया था। मेंहदावल के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े लोगों के आह्वान पर चंद्रशेखर आजाद यहां आए थे और क्रांतिकारियों के साथ बैठक कर अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का बिगुल बजाया था।
जुल्फिकार ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिवार का सदस्य होने के बाद भी सरकार की तरफ से कोई सुविधा उन्हें नहीं मिलती है। नगर पंचायत की ओर से कुछ वर्ष पहले प्रधानमंत्री आवास जरूर मिला है, लेकिन राशन कार्ड गरीबी रेखा के ऊपर का है। अंत्योदय राशन कार्ड के लिए जिला पूर्ति विभाग व तहसील का चक्कर काट कर थक गया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को 15 अगस्त व 26 जनवरी को याद करने तक लोगों ने सीमित कर दिया है।