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Sant Kabir Nagar News: जेल यातना के बाद भी नहीं आई आत्मविश्वास में कमी

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स्वंतत्रता संग्राम सेनानी पंडित लालसा प्रसाद मिश्र व स्वतंत्रता सेनानी यजुर्वेन्द मिश्र की तस? - फोटो : KHALILABAD
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जेल यातना के बाद भी नहीं आई आत्मविश्वास में कमी
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पूर्वांचल में स्वतंत्रता आंदोलन के नायक रहे पंडित लालसा प्रसाद
संवाद न्यूज एजेंसी
मेंहदावल (संतकबीरनगर)। आजादी के दीवानों पर अंग्रेजों के खिलाफ जुनून सवार था। जेल हो या संपत्ति की कुर्की कर आर्थिक तंगी पैदा करने की कोशिश, लेकिन देश भक्तों की इसकी परवाह नहीं थी। मेंहदावल ब्लॉक के रक्शा गांव निवासी मिश्र बंधुओं लालसा प्रसाद, वंशराज, श्यामलाल और द्विजेंद्र मिश्र ने कठिन दौर में भी तिरंगा लहराने के लिए संघर्ष जारी रखा। उनके बुलावे पर चंद्रशेखर आजाद और पंडित जवाहर लाल नेहरू मेंहदावल आए थे।
मेंहदावल ब्लॉक के रक्शा गांव निवासी स्वतंत्रा सेनानी के परिजन जवाहर लाल मिश्र बताते हैं कि उनके बाबा पंडित पटेश्वरी प्रसाद मिश्र के छह पुत्रों में से चार लालसा प्रसाद, वंशराज, श्यामलाल एवं द्विजेंद्र मिश्र ने छात्र जीवन से स्वतंत्रता आंदोलन की कमान संभाल ली थी। तत्कालीन बस्ती जनपद स्थित सक्सेरिया इंटर कॉलेज में पढ़ते समय सबसे बड़े पिता लालसा प्रसाद ने देश को स्वाधीन कराने की ठान ली थी।
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वर्ष 1933 में उन्होंने अंग्रेजी सरकार के खासमखास रहे राजा चंगेरा के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया और क्रांतिकारियों के साथ बांसी स्थित उसके महल के सामने भारत माता जय के नारे लगाए थे। इसके लिए उन्हें जेल जाना पड़ा था। जेल से छूटने के बाद डोहरिया में ट्रेन से सरकारी खजाना लूटने की घटना का नेतृत्व किया।
इसके बाद अंग्रेजी हुकूमत ने मिश्र बंधुओं को जिंदा या मुर्दा पकड़ने का फरमान जारी कर दिया था। ट्रेन लूट कांड में लालसा प्रसाद को छह माह की कैद व 100 रुपये जुर्माना भरना पड़ा। उनके जेल में रहने के दौरान श्याम लाल मिश्र ने कमान संभाली। उनके बुलावे पर चंद्रशेखर आजाद मेंहदावल आए थे। क्रांतिकारियों के साथ बैठक कर राजा चंगेरा को रास्ते से हटाने की योजना बनी।
उन्होंने बताया कि चंद्रशेखर आजाद ने बांसी स्थित राजा चंगेरा के महल पर धावा बोला था, पर मुखबिरी के कारण राजा चंगेरा महल छोड़ कर फरार हो गए थे। वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन तथा सविनय अवज्ञा आंदोलन का नेतृत्व करने के कारण मिश्र बंधुओं को नैनी जेल भेज दिया गया, जहां पर लालसा प्रसाद मिश्र की पंडित जवाहर लाल नेहरू से मुलाकात हुई।
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इसके बाद गाजीपुर जेल में आरएस पंडित एवं लाल बहादुर शास्त्री के साथ मिश्र बंधुओं ने जेल काटा। मिश्र बंधुओं पर अंग्रेजों की नाराजगी का आलम यह था कि लालसा प्रसाद मिश्र के इकलौते बेटे की मौत हो जाने पर भी उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई। वर्ष 1946 में श्यामलाल मिश्र के बुलावे पर पंडित जवाहर लाल नेहरु रक्शा गांव आए थे और यहां से नौदरी व अछिया के बीच स्थित बाग में क्रांतिकारियों की सभा को संबोधित किया था।
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