मौसम के बदलते मिजाज के साथ डायरिया धीरे- धीरे क्षेत्र में पांव पसारने लगा है। गांवों में न तो क्लोरीन की गोलियां ही बांटी जा रही है और न हीं सीएचसी मलौली में डायरियां के मरीजों के लिए अतिरिक्त कोई व्यवस्था की गई है। गदंगी और दूषित पानी भी डायरिया फैलने की मुख्य वजह है। क्षेत्र के मंझरिया गांव में डायरिया का प्रकोप अभी भी थमा नहीं है। लोग अभी भी पीड़ित होकर इधर-उधर दवा करा रहे है।
क्षेत्र के अन्य गांवों में भी यह बीमारी फैलना शुरू कर दी है। इन सबके बाद भी न तो स्वास्थ्य विभाग दवा वितरण कराने का काम कर रहा है और न ही पंचायत विभाग सफाई कर्मियों को भेज कर गांव में सफाई व्यवस्था पर ध्यान दे रहा है। मंझरिया की तरह यदि और गांवों में मरीजों की तादात बढ़ी तो अस्पताल पर मरीजों को भर्ती करने के लिए कोई अतिरिक्त व्यवस्था नहीं है।
मंझरिया गांव में अब तक 27 लोग डायरिया की चपेट में आ चुके। इनमें दो की मौत होने की बात भी गांव के लोग बता रहे है। बीमारी के भयंकर रुप धारण करने के बाद गांव में स्वास्थ्य कर्मी एक दिन गए और कुछ लोगों को दवा का वितरण करके आने के बाद गांव का रुख दुबा नहीं किए। 800 की आबादी वाले इस गांव में शुद्ध पानी के लिए दो इंडिया मार्का हैंड पंप लगाए गए है। इसमें से एक हैंडपंप वर्षों से खराब पड़ा है तो दूसरा दूषित जल उगल रहा है। गांव में गंदगी का आलम यह है कि मुख्य मार्ग पर गंदा पानी एकत्रित होकर बदबू कर रहा है। देशी हैंडपंप से गांव के लोग पानी पीने को मजबूर है। गांव वालों का कहना है कि गंदगी साफ करने के लिए सफाई कर्मी को बुलाया जा रहा है, लेकिन वह गांव में नही आ रहे है। प्रधान बलराम यादव ने कहा कि इंडियामार्का हैंड पंप लगाने के लिए जल निगम के लोगों से कहा जा रहा है, लेकिन ध्यान नही दे रहे है। गांव के लोग छोटे नल से पानी पीकर बीमारी का शिकार हो रहे है। इसी तरह चपरापूर्वी गांव में इस बीमारी के चपेट में आने से कई लोगों के पीड़ित होने की सूचना है। यहां भी पानी और गंदगी बीमारी का कारण है। अस्पताल पर मरीजों के भर्ती करने के लिए कोई अतिरक्ति व्यवस्था नही की गई है।
सीएचसी मलौली के अधीक्षक वी के शुक्ला ने बताया कि गांवों में दवा का वितरण करने के लिए समस्त एएनएम को निर्देशित किया जा चुका है। अस्पताल में भी कोई कमी नही है। मंझरिया हो या अन्य किसी भी गांव के मरीज सभी का इलाज सुचारु रूप से किया जा रहा है।