लचर विद्युत व्यवस्था नहीं बन सका चुनावी मुद्दा
- तार गिरने से आए दिन होती हैं दुर्घटनाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। जर्जर विद्युत तारों की वजह से विद्युत सप्लाई बाधित होने के साथ ही क्षेत्र में हादसे हो रहे हैं। इसके साथ ही तारों को बदलने की मांग लोग सालों से करते चले आ रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका और न ही जटिल हो सकी यह समस्या कभी चुनावी मुद्दा बन सका है।
हैंसर बाजार और पौली ब्लॉक के 300 गांवों में बिजली आपूर्ति उपकेंद्र मुखलिसपुर से होती है। करीब 30 से 40 किलोमीटर लंबाई में खींचे गए विद्युत तार काफी पुराने हो चुके हैं। गर्मी के महीने में जब तेज हवा चलती है तो तार गिर जाते हैं। जिससे आग लगने की घटनाएं भी होती है। मुखलिसपुर से धनघटा तक जाने वाली प्रमुख लाइन के तार हर दूसरे-तीसरे दिन गिर जाते हैं। जिससे समस्या बनी हुई है।
सेमरडाडी निवासी घनश्याम मौर्य का कहना है कि दोआबा क्षेत्र में विद्युत तार जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। तार बदलवाने की मांग जनप्रतिनिधियों से कई बार किया गया, लेकिन वह ध्यान नहीं दिए। महेश्वरपुर गांव निवासी रामरक्षा का कहना है कि इस क्षेत्र के लिए सबसे जटिल समस्या विद्युत तार हो गए हैं। साथ ही धनघटा क्षेत्र में विद्युत सब स्टेशन बनाए जाने की भी जरूरत है। यह समस्या कभी यहां के लिए चुनावी मुद्दा न तो बना और ना ही किसी ने समाधान करने की कोशिश की। बकौली कला गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद गुप्ता का कहना है कि धनघटा चौक पर खींचे गए विद्युत तार जमीन से काफी करीब आकर लटक रहे हैं। जिससे हादसा होने की संभावना बनी हुई है, लेकिन अधिकारी और राजनेता इस पर ध्यान दे रहे हैं। रुपिन निवासी महेंद्र प्रसाद चौहान का कहना है कि यहां पर राजनेता केवल अपनी राजनीतिक रोटी सेकने के लिए आते हैं। यहां की समस्याओं से उनका कुछ भी लेना देना नहीं है। चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र को भगवान भरोसे छोड़ देते हैं।