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Sant Kabir Nagar News: ढड़वा ताल बना उपेक्षा का शिकार, जिम्मेदारों की नहीं पड़ रही नजर

Thu, 07 Mar 2024 11:26 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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- कभी कमल की खेती व रोहू मछली के लिए मशहूर था ताल
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- दस किलोमीटर लंबे ताल के सुंदरीकरण का नहीं हो रहा

संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। क्षेत्र के प्रसिद्ध ढड़वा ताल लंबे समय से उपेक्षा का शिकार बनकर रह गया है। ताल में कमल की खेती के विकास की संभावना धूमिल दिख रही है। व्यावसायिक दृष्टि से अनुकूल कमल की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। दस किलोमीटर लंबा ताल चार दशक पूर्व पास से गुजरने वाली सरयू नदी का हिस्सा हुआ करता था। प्रति वर्ष नदी के जलस्तर में वृद्धि के बाद ढड़वा ताल पानी से लबालब भर जाता था। लेकिन सरयू नदी पर एमबीडी तटबंध का निर्माण होने के बाद नदी व ताल के बीच संपर्क टूट गया। ताल में अब पानी पहुंचने का आधार सिर्फ बारिश के पानी पर निर्भर होकर रह गया है। टढ़वा ताल पौली ब्लाॅक के शंकरपुर से शुरू होकर हैंसर बाजार विकासखंड के उमरिया बाजार तक पहुंचता है।

प्राकृतिक रूप से ताल में तैयार होते हैं कमल के फूल

ढड़वा ताल कमल की प्राकृतिक खेती के लिए प्रसिद्ध है। दस किलोमीटर लंबे ताल में कईं तरह के कमल खिलते हैं। दशकों से प्राकृतिक रूप से कमल की खेती के विकास के जिम्मेदारों के जरिए कभी ठोस कदम नहीं उठाए गए। स्थानीय स्तर पर कमल का उपयोग पूजा पाठ में ही किया जाता है।
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कमल की खेती को नहीं मिला व्यावसायिक रूप

दस किलोमीटर ताल में पैदा होने वाले कमल को व्यवसायिक रूप नहीं मिल सका। ताल के इर्द-गिर्द अधिकांश भू-भाग अवैध कब्जे का शिकार हो गए हैं। क्षेत्र में नकदी फसल को बढ़ावा देने के लिए जहां अनेक प्रयास किए जा रहे है। वहीं व्यवसायिक दृष्टि से मुफीद साबित होने वाली कमल की खेती के विकास पर जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया।


अब बाजारों में भी नहीं मिल रही ढड़वा लाल की प्रसिद्ध रोहू मछली

कभी ढड़वा ताल की रोहू मछली गोरखपुर के मछली मंडी में मशहूर हुआ करती थी। मछली खाने वालों का कहना है कि जो स्वाद इस ताल की रोहू मछली में है। उस तरह का स्वाद अन्य मछलियों में नहीं मिलने वाली है। लेकिन ताल की सफाई व पानी रुकने का प्रबंध न होने की वजह से अब ढड़वा ताल में रोहू मछली खोजने पर नहीं मिलने वाली है।


बोले लोग


कमल की खेती सिर्फ तीन से चार माह में तैयार हो जाती है। यही सबसे बड़ी वजह है कि कृषि विशेषज्ञ इसे कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल की श्रेणी में गिनते हैं। इसकी खेती के लिए माॅनसून का माह सबसे बढ़िया होता है। ज्यादा बारिश फसल के लिए उपयुक्त होती है।

-राजेन्द्र मौर्य, धनघटा



कमल की खेती को बढ़ावा देने की मांग लंबे अरसे से की जा रही है। प्राकृतिक रूप से उपलब्ध संसाधन का ठीक तरह से उपयोग न होने से कमल की खेती उपेक्षा का शिकार बनकर रह गई।
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-अशोक अग्रहरि, उमरिया बाजार




ढड़वा ताल के सुंदरीकरण के लिए शासन स्तर पर पत्र भेजा गया है। शीघ्र ढड़वा ताल के सर्वे का कार्य किया जाएगा। ताल के सुंदरीकरण के साथ व्यावसायिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

- गणेश चौहान, विधायक धनघटा
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