संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मसिंहवा। कस्बे में चल रहे विष्णु महायज्ञ में प्रवचन कर रहीं कथा व्यास निकुंज मंजरी ने कहा कि प्रतीति (विश्वास) व प्रीति (प्रेम) के बिना की गई भक्ति फलदायी नहीं हो सकती। इसका उल्लेख गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में स्पष्ट रूप से किया है।
उन्होंने कहा कि ज्ञान बिना विश्वास नहीं जमता और विश्वास बिना प्रीति नहीं होती और इन सबके बिना भक्ति वैसे ही कमजोर होती है, जैसे पानी पर चिकनाई। भगवान को निर्मल हृदय प्रिय है। इसलिए छल कपट वाली भक्ति काे कोई फल नहीं मिलता। भक्ति निस्वार्थ और निश्छल होनी चाहिए। प्रभु की महिमा और उनके स्वरूप को जाने बिना उन पर विश्वास नहीं जमता है और बिना विश्वास के निस्वार्थ प्रेम भी नहीं उत्पन्न हो सकता अर्थात प्रतीति और प्रीति के बिना भक्ति मात्र एक औपचारिक कर्मकांड बन जाती है जो आध्यात्मिक रूप से अपूर्ण है।
कथा के दौरान सर्वेश्वर पांडेय, भदेश्वर पांडेय, राजेश त्रिपाठी, ओम प्रकाश त्रिपाठी, तारकेश्वर, शिवनारायण पटवा, दीपक कुमार पांडेय, रोहिताश पांडेय, अजय कुमार प्रजापति, प्रद्युम्न यादव, श्रीधर, संकटा पांडेय, सुरेश कुमार, संजय, सहित अन्य लोग मौजूद रहे।