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देवरिया कांड : सक्रिय हुआ शासन-प्रशासन, फरियादियों को न्याय मिलने की जगी उम्मीद

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शासन ने 30 नवंबर तक विशेष अभियान चलाकर लंबित मामलों के निस्तारण का दिया निर्देश
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संवाद न्यूज एजेंसी

धनघटासंतकबीरनगर। जमीन संबंधी विवाद को लेकर देवरिया जिले में दो परिवारों के छह लोगों की हत्या ने शासन-प्रशासन की नींद उड़ा दी है। पैमाइश, वरासत, वसीयत, दाखिल- खारिज जैसे विवाद का समाधान लंबित होने के कारण जो फरियादी वर्षों से तहसील का चक्कर काट रहे थे, उन्हें तीन माह के भीतर न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। फरियादियों का कहना है कि शासन के निर्देश का अगर अधिकारी ईमानदारी के साथ पालन किए तो अधिकांश जमीन संबंधी विवाद गांवों में समाप्त हो जाएंगे।

दो अक्तूबर को देवरिया जिले में हुई घटना के बाद शासन ने पांच अक्तूबर को जमीन संबंधी विवादों का निस्तारण करने के लिए शासनादेश जारी हुआ। जिसमें कहा गया है कि पैमाइश, बंटवारा, दाखिल खारिज, वरासत, वसीयत, पक्की पैमाइश संबंधी विवादों का निस्तारण तय समय सीमा के भीतर किया जाए। यह भी कहा गया है कि पैमाइश में पानी और फसल होने की बहानेबाजी नहीं चलेगी। न्यायालय में लंबित पड़े वादों का निस्तारण किया जाए। जिससे जमीन संबंधी विवादों को लेकर होने वाली घटनाओं पर रोक लग सके। इसका पालन करने के लिए जिलाधिकारी ने एसडीएम, तहसीलदार को सख्त निर्देश दिया है। जिसका असर मंगलवार को धनघटा तहसील में देखने को भी मिला। वैसे एसडीएम शाम 5:00 बजे तक अपने कोर्ट में बैठकर सुनवाई करते नजर आए। वैसे तो जिले में विभिन्न राजस्व न्यायालयों में कुल 20,227 मामले लंबित हैं। जिसमें तीन वर्ष से अधिक समय से 2630 मामले में लंबित हैं। इसमें एसडीएम धनघटा के न्यायालय में कुल 816 मामले लंबित हैं। जिनमें 131 मामले तीन साल से अधिक के हैं। जबकि तहसीलदार कोर्ट में कुल 1809 मामले लंबित हैं। जिनमें 209 मामले तीन साल से अधिक के है। नायब तहसीलदार न्यायालय में कुल 1692 मामले लंबित हैं। जिनमें 95 मामले तीन साल से अधिक के हैं। लंबित पड़े मामलों के मामलों के निस्तारण के लिए अधिकारी जहां नियमित कोर्ट में बैठकर सुनवाई कर रहे हैं। वही संपूर्ण समाधान दिवस, समाधान दिवस, जनसुनवाई पोर्टल आदि पर आए मामलों का निस्तारण करने के लिए संबंधित अधिकारी और लेखपाल अपना कार्य शुरू कर दिए हैं।
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केस नंबर- एक
प्रसादीपुर गांव निवासी जयराम पुत्र सहवीर का कहना है कि उनके पिता की मौत 2010 में हुई थी। वरासत के लिए दौड़ते- दौड़ते परेशान हो गए तो वर्ष 2019 में वाद दाखिल किए। जो आज तक लंबित पड़ा हुआ है। शासन के आदेश पर अधिकारी अगर अमल करेंगे तो समस्या का समाधान शीघ्र हो सकता है।

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केस नंबर- दो
बेलमा गांव निवासी राम सकल का कहना है कि उन्होंने धारा 24 के तहत वर्ष 2018 में जमीन के सीमांकन के लिए वाद दाखिल किया, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो सका, और तभी से तारीख पर तारीख मिलती चली आ रही है। अब उम्मीद जगी है कि प्रकरण सुलझ जाएगा।

केस नंबर- तीन
खजूर टिकरा गांव निवासी जगदीश ने बताया कि पैमाइश के लिए वर्ष 2020 से तहसील का चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन जमीन की पैमाइश नहीं हो रही है और विपक्षी उसकी भूमि पर कब्जा करते चला आ रहे है। शासन के निर्देश के बाद तहसील प्रशासन की सक्रियता बढ़ी है तो उम्मीद जगी है कि उसकी समस्या भी सुलझ जाएगी।
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केस नंबर-
रोसया बाजार निवासी केवला देवी का कहना है कि गांव निवासी दलित महिला की जमीन वर्ष 2016 में गांव का रहने वाला एक सामान्य बिरादरी का आदमी बगैर जिला अधिकारी के परमीशन के बैनामा करवा लिया। बैनामा को खारिज करने के लिए नायब तहसीलदार न्यायालय में उसी समय बाद दाखिल किया, लेकिन आज तक मामला लंबित पड़ा हुआ है।

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अधिवक्ता दिलीप कुमार त्रिपाठी का कहना है कि भूमि विवाद के मामलों में अक्सर पुलिस यह कहकर टाल देती है कि उन्हें राजस्व की जानकारी नहीं है। लेखपाल समय रहते ऐसे मामलों का निस्तारण करने में रुचि नहीं लेते हैं। यहां तक की जमीन की पैमाइश कराने में लोगों की एड़ियां घिस जाती हैं। मुकदमों में वर्षों तारीख पर तारीख मिलती है। जिसका नतीजा है कि लोगों के बीच विवाद बढ़ता चला जा रहा है। समय रहते अगर राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम जमीन संबंधी विवादों का मौके पर पहुंचकर निस्तारण करा दे तो पीड़ित को को न तो अधिक भाग दौड़ करना पड़ेगा और न लोगों के बीच विवाद गहराएंगे।
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राजस्व न्यायालयों में लंबित पड़े मामलों को सूचीबद्ध कराया गया है। प्राथमिकता के आधार पर लंबित केस निपटाएं जाएंगे। विवादों के निस्तारण के लिए पुलिस और राजस्व की टीमों को मौके पर भेज कर मामले का निस्तारण कराया भी जा रहा है। इसके साथ ही ग्राम समाज की भूमि का ग्रामवार रजिस्टर तैयार कराया जा रहा है। जहां कहीं सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा होगा, उसे भी हटवाया जाएगा।
महेंद्र सिंह तंवर,डीएम
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