धैर्य की कमी से कमजोर पड़ रही रिश्तों की डोर
- फोटो : अमर उजाला
संतकबीरनगर। दुधारा थाना क्षेत्र के रहमत अली (बदला हुआ नाम) की पत्नी शबरून्निशा नाराज होकर मायके चली गई। मामला महिला थाने के परिवार परामर्श केंद्र में पहुंचा। दोनों को बैठाकर बात शुरू हुई तो पता लगा कि ससुर ने डांट दिया था। पति ने पत्नी की जगह पिता का साथ दिया। इससे वह नाराज हो गई। धनघटा थाना क्षेत्र के महेंद्र सिंह पत्नी के व्यवहार से दुखी हैं और उसे साथ नहीं रखना चाहते। यह दो उदाहरण तो महिला थाने के परिवार परामर्श केंद्र में आ रहे मामलों में चुनिंदा हैं। इतना ही नहीं, मामूली बात पर अलग रहने या फिर जान देने-लेने जैसे आत्मघाती कदम उठाने की बात इन दिनों बढ़ रही है।
देवरिया में तीन बच्चों संग ट्रेन से कटी महिला के प्रकरण को ध्यान में रखते हुए संतकबीरनगर जैसे शांत जनपद में पारिवारिक विवाद की वजह तलाशने की कोशिश की गई तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। महिला थाने के परिवार परामर्श केंद्र में बीते वर्ष जनवरी से लेकर दिसंबर के बीच पति-पत्नी विवाद से संबंधित 289 मामले आए थे। हालांकि, इनमें से 238 मामलों में मामूली प्रयास के बाद सुलह भी हो गया। जबकि 42 मामले कोर्ट में लंबित हैं। सात प्रकरणों में दोनों पक्षों के जिद पर अड़े रहने की वजह से मुकदमा दर्ज कराना पड़ा। इसके अलावा कई ऐसे प्रकरण हैं जिनमें पति-पत्नी के बीच भरण-पोषण का मुकदमा चल रहा है। दोनों पक्ष हर तारीख पर पैरवी करने आ रहे हैं, लेकिन सुलह मंजूर नहीं है। महिला थाने की एसओ अनीता यादव का कहना है कि परिवार परामर्श केंद्र में आने वाले अधिकांश मामले थोड़ी सी मनुहार व डांट-डपट से सुलझ जाते हैं। कई ऐसे प्रकरण आते हैं जिसमें पति या पत्नी किसी मामले पर मिलकर निर्णय लेने की बजाय स्वतंत्र निर्णय लेना चाहते हैं। दूसरे को यह मंजूर नहीं होता और खुद को अपमानित महसूस करने लगता है। घर के सदस्यों का थोड़ा सा भी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं होता। परिवार परामर्श केंद्र में पति-पत्नी केे आमने-सामने बैठाकर समझाया जाता है तो वे खुद गलती मानकर साथ रहने को राजी हो जाते हैं।