मेंहदावल। क्षेत्र में किसानों को खाद के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है। समितियों पर डीएपी के लिए सुबह से ही किसानों को भूखे-प्यासे लाइन लगानी पड़ रही है। कई घंटे इंतजार करने के बाद उन्हें एक बोरी डीएपी काफी मशक्कत करने के बाद मिल पा रही है। खाद नहीं मिलने से रबी फसल की बुआई का कार्य भी पिछड़ता जा रहा है।
रविवार को साधन सहकारी समिति ढोढ़ पर खाद आने की सूचना पर सुबह से ही गांवों के किसानों की भीड़ जुट गई। छपिया अंगद गांव के किसान अजय कुमार त्रिपाठी, पप्पू, शिवेंद्र, हरिश्चंद्र आदि ने कहा कि इस समय आलू, मटर, चना, सरसों आदि की बोआई चल रही है। गेहूं की बुआई का सही समय 15 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच होता है। अधिकतर किसान समितियों से एडवांस में डीएपी ले रहे हैं। इससे कुछ जगहों पर खाद की कमी पड़ जा रही है। समिति का भवन क्षतिग्रस्त हो जाने से सचिव समिति पर आने वाली डीएपी को बिना समिति के सदस्यों और किसानों को बताए सात किमी दूर घूरापाली में बांट देते हैं। इससे ढोढ़ क्षेत्र के किसान डीएपी खाद से वंचित हो जा रहे हैं।
किसान बद्री विशाल, उदयभान सिंह, अखिलेश सिंह, राज बहादुर ने बताया कि यदि समय से डीएपी खाद नहीं मिली तो खेत से नमी चली जाएगी। आलू, सरसों, मटर, चना, मसूर की बुआई भी काफी पिछड़ जाएगी। इससे फसल के उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। किसान अजय कुमार तिवारी, अनिल कुमार निषाद, राहुल तिवारी ने कहा कि बुआई के समय डीएपी, सिंचाई के बाद यूरिया बाजार से गायब रहती है। किसानों को मौसम, महंगाई व छुट्टा जानवरों की मार झेलनी पड़ रही है।
डीएपी नहीं मिलने से निजी दुकानदारों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। समितियों पर डीएपी नहीं मिलने से प्राइवेट दुकानदारों की पौ बारह है। घटिया किस्म की एनपीके निजी दुकानदार 13 सौ रुपये में बेच रहे हैं। इस संबंध में एडीओ एजी अशोक कुमार मिश्र ने बताया समितियों पर एनपीके, नैनो डीएपी समेत कई प्रकार के उर्वरक मौजूद हैं। जागरूकता की कमी से किसान सिर्फ डीएपी की खरीदारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि डीएपी की रैक आने पर समितियों को भेजी जा रही है।