संतकबीरनगर। पुलिस को गच्चा देकर गोरखपुर के माफिया विनोद उपाध्याय ने सोमवार को हत्या के एक मामले में एफटीसी प्रथम की कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कोर्ट ने उसे अभिरक्षा में लेते हुए बस्ती जिला कारागार भेजवा दिया। इसकी भनक लगते ही गोरखपुर और संतकबीरनगर की पुलिस हाथ मलती रह गई।
एसपी हेमराज मीणा ने बताया कि बैरहवा, नेपाल का रहने वाला जीत नरायन मिश्रा गोरखपुर का शातिर अपराधी था। उसकी बहन बखिरा क्षेत्र के फेउसी गांव में गोरेलाल के यहां ब्याही गई थी। गोरखपुर के माफिया विनोद उपाध्याय और जीत नरायन मिश्र की प्रतिद्वंद्विता चल रही थी। जीत नरायन बस्ती जेल में बंद था और सात अगस्त 2005 को जेल से छूटा था। जैसे ही फेउसी गांव में पहुंचा, एक कार में सवार दो बदमाशों ने जीत नरायन मिश्र की गोली मार कर हत्या कर दी थी।
जबकि उसके बहनोई गोरेलाल घायल हो गए थे। गोरेलाल की तरफ से ही उस मामले में बखिरा थाने में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज हुआ था। बाद में विवेचना से विनोद उपाध्याय समेत दो लोग प्रकाश में आए थे। जबकि साजिश रचने के मामले मेें संजय सिंह, संजीव राय, शिवचरन रावत, सत्यव्रत उर्फ छोटे राय निवासीगण गोरखपुर और देवरिया जिले के रहने वाले ब्रजभूषण त्रिपाठी का नाम प्रकाश में आया था।
उसी हत्या के मामले में 12 सितंबर 2005 को गोरखपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के आम बाजार बशारतपुर निवासी विनोद कुमार उपाध्याय और खजनी क्षेत्र के भखरा गांव निवासी प्रभाकर द्विवेदी के खिलाफ बखिरा थाने में गैंगेस्टर एक्ट का मुकदमा दर्ज हुआ था। उसकी विवेचना दुधारा पुलिस ने की थी। वर्ष 2012 में ही इस मुकदमे का ट्रायल शुरू हो गया था। 2015 से कोर्ट से लगातार माफिया विनोद उपाध्याय के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो रहा था।
उसकी पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही थी। इधर, गोरखपुर में भी एक मामले में माफिया विनोद उपाध्याय वांछित चल रहा था। एसएसपी गोरखपुर ने इसके खिलाफ 25000 रुपये का इनाम भी घोषित किया था। इसके खिलाफ करीब दो दर्जन संगीन धाराओं में मुकदमें दर्ज है। आगे बताया कि दोनों जनपद की पुलिस इसकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी। पुलिस से बचने के लिए माफिया विनोद उपाध्याय ने चुपके से सोमवार को एफटीसी प्रथम की कोर्ट में सरेंडर कर दिया और जेल भेजा गया।