सांथा ब्लॉक में मनरेगा घोटाले की जांच कर रही सीबीआई टीम अपनी जांच के अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक 2007 से 2010 के बीच मनरेगा के तहत हुए कार्यों का ब्यौरा देहरादून कार्यालय तलब किया जा चुका है।
साथ ही पांच, छह नवंबर को देहरादून कार्यालय में ही पीडब्लूडी विभाग और आरईडी विभाग के सात इंजीनियरों से भी इस संबंध में पूछताछ भी की जा चुकी है। संभावना है कि माह के अंत में सीबीआई टीम जिले में आ सकती है।
सीबीआई टीम वर्ष 2007 से 2010 के बीच हुए मनरेगा से जुड़े घोटाले की जांच कर रही है। मनरेगा से कराए कई कार्यों का स्थलीय सत्यापन, जॉबकार्ड धारकों का भौतिक सत्यापन और सामग्री क्रय में लगाए गए कई फर्मों के बिल बाउचर का सत्यापन टीम कर चुकी है। भौतिक जांच के दौरान ही घोटाला की बात सामने आ चुकी है।
सूत्रों की माने तो सीबीआई टीम ने आरईडी और पीडब्लूडी विभाग के सात इंजीनियरों को पूछताछ के लिए देहरादून कार्यालय बुलाई और घोटाले से जुड़ी जानकारियां हासिल की।
इसी कड़ी में ब्लॉक में 2007 से 2010 में मनरेगा के तहत हुए खर्च का ब्यौरा भी मांगा था। सांथा ब्लॉक में मनरेगा के मद से वर्ष 2007-08 में दो करोड़ पंद्रह लाख पांच हजार रुपये खर्च हुए थे। जबकि वर्ष 2008-09 में एक करोड़ चौंतीस लाख सत्ताइस हजार, वर्ष 2009-10 में दो करोड़ पच्चीस लाख खर्च हुए थे।
अभी जांच की प्रक्रिया में कुछ और अभिलेख जुटाने हैं और कुछ लोगों से पूछताछ बाकी है। इसलिए नवंबर के अंत में सीबीआई टीम जिले में कभी भी आ सकती है। इससे घोटालेबाजों को भी डर सताने लगा है कि आखिर सीबीआई टीम इस बार क्या करेगी।