धनघटा तहसील क्षेत्र में कटान कर रही घाघरा नदी।
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घाघरा का जलस्तर बढ़ने से पड़रिया गांव के पास जीरो प्वाइंट पर सिंचाई विभाग द्वारा बनवाया गया रैंप बुधवार को नदी की धारा में विलीन हो गया। उधर, दौलतपुर, चपरापूर्वी, जगदीशपुर के सीवान में चल रहे कटान से अब तक कई किसान भूमिहीन हो चुके हैं। नदी की कटान के जद में चपरापूर्वी के केवटहिया टोला आता दिख रहा है। नदी की धारा गांव के हीरालाल के घर के करीब पहुंच चुकी है।
बस्ती जिले के सीमा पर जीरो प्वाइंट के करीब सिंचाई विभाग द्वारा पड़रिया गांव वालों को खेत में आने जाने के लिए करीब 20 मीटर दूरी तक रैंप बनवाया गया था। जिसे नदी ने अपनी धारा में मिला लिया है। अब गांव के लोगों को आने जाने का मार्ग भी बंद हो गया है। पश्चिम में नदी में आए उफान से जहां पशु पालक परेशान हैं, वही पूरब में नदी की कटान से किसानों की फसल और खेत पानी में समाती जा रही है। बुधवार को तेजी के साथ जलस्तर बढ़ने लगा था। राजाराम, हरीराम, पारस, कन्हैया, पिन्टू आदि का कहना है कि नदी के कटान से मिश्रलौलिया गांव का सीवान समाप्त हो गया।
अब नदी दौलतपुर, जगदीशुपर ,चपरापूर्वी गांव के सीवान में कटान करती हुई लोगों के खेत को अपने धारा में मिला रही है। गांव वालों का कहना है कि बांध की मरम्मत कार्य भी इस वर्ष नही की गई। बांध को सिचाई विभाग के लोग उसी तरह मजबूत रहने का दावा कर रहे है जिस तरह वर्ष 2013 में कर रहे थे और जब बांध को नदी ने काट दिया तो सिंचाई विभाग समेत जिले के अन्य अधिकारियों की जुबा बंद हो गई थी। चपरापूर्वी गांव के केवटहिया टोला के पास बनाए गए ठोकर के करीब ही नदी कटान करते हुए गांव के हीराराल के घर के करीब पहुंच गई है। गांव वालो का कहना है कि नदी इसी तरह बढी तो 24 घंटे के भीतर कई गांव बाढ़ के चपेट में आ जाएंगे।
आगापुर गुलरिहा गांव के करीब पानी पहुंचकर गांव को चारों तरफ से घेर रहा है। यही हाल पटऊवा पुरवा, गुनवतिया, चकदहा आदि गांवों का भी है। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता बुधवार को बांध पर पहुंच कर स्थिति का जायजा लिए। उन्होंने पूरी तरह बांध को सुरक्षित और मजबूत बताया।