दो साल पूर्व एक किशोरी के अपहरण का मामला
तत्कालीन एसपी पर अपहरणकर्ताओं को बचाने का आरोप
आईजी लखनऊ कर रहे हैं विभागीय जांच
शहर के एक मोहल्ला निवासी एक किशोरी का दो साल पूर्व हुए अपहरण मामले में पीड़ित परिवार ने आईपीएस अफसर से जान-माल का खतरा जताया है। पीड़ित परिवार के मुताबिक युवती के अपहरण में तत्कालीन एसपी एसके सिंह की भी संलिप्तता थी, जिससे शासन ने उनके खिलाफ विभागीय जांच बैठाई है। विभागीय जांच में पीड़ित परिवार ने 11 जुलाई 2016 को आईजी मुख्यालय में गवाही दे दी है, जिससे परिवार को दूसरे लोगों के माध्यम से धमकाया जा रहा है। पीड़िता किशोरी की मां ने बुधवार को अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद के पदाधिकारियों के साथ एसपी अखिलेश चौरसिया को ज्ञापन देकर सुरक्षा की गुहार लगाई है।
बता दें कि एक मोहल्ला निवासी आढ़ती एवं सपा नेता की नाबालिग पुत्री का कुछ लोगों ने 19 मई 2014 को अपहरण कर लिया था। मामला तूल पकड़ने पर पुलिस ने किशोरी को लखनऊ से बरामद कर लिया था, लेकिन अपहरणकर्ताओं को बचाने की पुरजोर कोशिशें की गईं। आरोप है कि एसपी भी अपराधियों को बचाने में जुट गए और पीड़ित परिवार पर ही दबाव बनाने का प्रयास किया। इससे क्षुब्ध शहर वासी सड़कों पर आंदोलित हो गए थे, जिसमें तत्कालीन एसपी एसके सिंह का भी नाम उछला था। मामला हाईलाइट होने पर शासन ने एसके सिंह को हटाकर मामले में विभागीय जांच के आदेश दिए थे। बुधवार को पीड़िता की मां और अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद के राष्ट्रीय महासचिव दिलीप गुप्ता ने एसपी अखिलेश चौरसिया को ज्ञापन देकर परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। ज्ञापन में आरोप लगाया है कि गवाही देने के बाद से तरह-तरह की अफवाहें फैलाकर परिवार को जान से मारने को धमकाया जा रहा है।