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नसबंदी के 22 दिन बाद महिला की मौत

Sat, 20 Jan 2018 10:53 PM IST
santkabirnagar
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crime shimla
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हैंसर। 
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धनघटा क्षेत्र के सियरखुर्द गांव की रहने वाली एक महिला की मौत नसबंदी कराने के 22 दिन बाद शुक्रवार की रात इलाज के लिए लखनऊ ले जाते समय रास्ते में हो गई। शनिवार को लाश लेकर थाने पर पहुंचे परिजनों ने पुलिस को तहरीर देकर सीएचसी मलौली के डॉक्टर के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
पीड़ित रामअचल का आरोप है कि गत 29 दिसंबर को उसने अपनी पत्नी बबली की नसबंदी सीएचसी मलौली की एक महिला डॉक्टर से कराई थी। ऑपरेशन कराने के चार दिन बाद ही बबली की तबीयत खराब होने लगी तो उसे लेकर मलौली अस्पताल पर गए। जहां इलाज के बाद भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो मलौली से जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में इलाज हुआ लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ तो वहां से बबली को मेडिकल कॉलेज गोरखपुर भेज दिया गया। जहां इलाज चल रहा था कि शुक्रवार की सुबह अचानक उसकी हालत बिगड़ गई। मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के डॉक्टर यह कहते हुए उसे मेडिकल कॉलेज लखनऊ के लिए रेफर कर दिए कि नसबंदी के दौरान उसकी आंत को सिल दिया गया है। इस कारण आंत फट गई है। इसका उपचार अब लखनऊ में ही हो पाएगा। पीड़ित का कहना है कि लखनऊ ले जाते समय रास्ते में ही बबली की मौत हो गई तो एंबुलेंस का चालक शव को उतार कर भाग निकला। पीड़ित ने थाने पर तहरीर देकर डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज किए जाने की मांग की। एसओ प्रदीप सिंह का कहना है कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। तहरीर मिली है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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मामले को दबाने में जुटा रहा स्वास्थ्य महकमा
संतकबीरनगर। धनघटा क्षेत्र के सियरखुर्द गांव की एक महिला की नसबंदी के 22 दिन बाद हुई मौत को दबाने में स्वास्थ्य महकमा जुटा रहा। महिला की हालत ज्यादा खराब होने की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आनन-फानन उसके परिजनों को 20 हजार का चेक रेड क्रॉस सोसायटी के जरिए 19 जनवरी को भेजवाया गया था लेकिन 20 जनवरी की सुबह महिला की मौत हो गई। मृतक महिला के परिजनों ने आरोपी चिकित्सक पर कार्रवाई की मांग की है। सीएमओ डॉक्टर अभय चंद श्रीवास्तव ने बताया कि महिला की मौत के मामले में जांच टीम गठित कर दी गई है। इसमें अपर सीएमओ जीएम शुक्ला, डीआईओ एस रहमान शामिल हैं। टीम को जल्द से जल्द रिपोर्ट देनेे के लिए कहा गया है।

मासूमों के सिर से छिन गई मां की ममता
हैंसर। 
डॉक्टर की लापरवाही ने बबली के मासूम बच्चों से हमेशा के लिए मां की ममता छीन ली। शनिवार को बबली का शव आने के बाद बच्चे जब बिलख रहे थे तो उन्हें देखने वालों की आंखे भर आईं। 
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सियरखुर्द गांव के रहने वाले रामअचल ने शिवांगी (10), आनंद (7), अनामिका (5), दिव्यानी (3) और मुस्कान एक वर्ष की प्राप्ति के बाद परिवार नियोजन रुख अख्तियार किया। उसने पत्नी बबली को 29 दिसंबर के दिन आशा के साथ नसबंदी कराने के लिए सीएचसी मलौली पर भेजा। नसबंदी हुई, लेकिन वह बबली की जान की दुश्मन बन गई। शनिवार को दादी दुलारी देवी के साथ धनघटा थाने पर पहुंचे बबली के मासूम बच्चे जब मां को कफन में  पापा को दहाड़ें मारते देखे तो रोने लगे। मासूम अनामिका, दिव्यानी और मुस्कान लोगों को रोते देखकर उनका चेहरा देख रहे थे। यह मासूम मां की ममता कभी न मिलने की बात से अनजान होकर निहार रहे थे। 
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