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हादसे में मासूम की मौत, मां-चाचा घायल

Wed, 29 Nov 2017 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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जिलाअस्पताल में रोते बिलखते हर्ष के परिजन। - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
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संतकबीरनगर। खलीलाबाद-मेंहदावल मार्ग पर मौलाना आजाद इंटर कॉलेज के पास बुधवार को ट्रक की चपेट में आने से बाइक पर पीछे मां की गोद में बैठे मासूम की मौत हो गई। जबकि मां और चाचा घायल हो गए। घटना के बाद चालक वाहन लेकर भाग निकला। मौके पर जुटे लोगों ने तीनों को जिला अस्पताल भेजा। डॉक्टरों ने मासूम को मृत घोषित कर दिया।
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 दुधारा क्षेत्र के पचावा गांव निवासी 23 वर्षीय अशोक कुमार यादव अपनी भाभी सावित्री पत्नी संतोष यादव और ढाई साल के भतीजे हर्ष को लेकर बाइक से खलीलाबाद जा रहे थे। सावित्री गोद में बेटे हर्ष को लेकर बाइक पर पीछे बैठी थीं। मौलाना आजाद इंटर कॉलेज के पास सामने से आए ट्रक कीं टक्कर से बाइक सड़क पर गिर गई और तीनों लोग घायल हो गए।

मौके पर गंगैचा निवासी रमेश कुमार समेत तमाम लोग जुट गए और तीनों को जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां हर्ष को मृत घोषित कर दिया। घायल अशोक और उनकी भाभी सावित्री का उपचार किया जा रहा है। सावित्री के बाएं हाथ की हड्डी फ्रैक्चर हो गई है। जबकि अशोक को कई जगह चोटें आई हैं। पीड़ित पिता संतोष कुमार यादव ने बताया कि हर्ष की आंख में कुछ परेशानी थी।
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छोटे भाई अशोक उसकी पत्नी सावित्री और बेटे हर्ष को लेकर खलीलाबाद बाईपास तक बाइक से जाते और फिर वहीं से बस से गोरखपुर बेटे को उपचार कराने ले जाते, लेकिन लापरवाह ट्रक चालक ने उसके मासूम बेटे की जान ले ली। पीड़ित पिता ने कोतवाली में तहरीर दे दी। कोतवाल वीरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि ट्रक चालक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। शव का पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया।

इकलौते बेटे की मौत पर बिलख रहे मां- बाप
संतकबीरनगर। मां की आंखों के सामने ही इकलौते बेटे की मौत हो गई। जख्मी मां अपने बेटे का शव देख फफक पड़ी। लड़खड़ाती आवाज में मां के मुंह से बस यहीं निकल रहा था कि ट्रक चालक ने उसके लाल की जान ले ली। वहीं दूसरी तरफ पिता संतोष कुमार यादव अपने घर के इकलौते चिराग के बुझ जाने से गमगीन थे।

पोस्टमार्टम हाऊस पर आए गांव के लोग और रिश्तेदार भी गमगीन थे। संतोष यादव ने बताया कि उसके पास एक चार की बेटी हर्षिता और ढाई साल का बेटा हर्ष था। हर्ष की आंखों की परेशानी की वजह से गोरखपुर उपचार के लिए पत्नी को भाई संग भेेजे थे। संतोष फफक कर रोने लगे। वहां मौजूद कर किसी की आंखें नम हो गईं।
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