फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदलते रहे विवेचक,नहीं मिला न्याय

Sun, 20 Mar 2016 11:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
विज्ञापन
नेयाय की उम्मीद में। - फोटो : अंबरीश‌ मिश्रा
विज्ञापन
 तीन साल पहले अपहृत बेटे के मामले में पीड़ित मां-बाप भले ही पुलिस से नाउम्मीद है,लेकिन बेटे के अभी भी लौटने की उन्हें उम्मीद है। कछुए की चाल से सरक रही किशोर के अपहरण की विवेचना में दस विवेचक बदल गए और कई पर्यवेक्षणीय अधिकारी सीओ का भी तबादला हो गया,लेकिन विवेचना अभी भी लंबित है। आईजी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एएसपी को जांच सौंपी है। जांच में विवेचक और पर्यवेक्षणीय अधिकारी के स्तर से लापरवाही बरती गई होगी तो उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
विज्ञापन

    धनघटा क्षेत्र के बगही गांव निवासी परमात्मा यादव और उनकी पत्नी अनीता घर पर मायूस बैठी थी। अपहृत बेटे के मामले को कुरेदन पर उनका दर्द छलक गया। दंपति ने बताया कि उनका बड़ा बेटा मनीष यादव 14 वर्ष 15 सितंबर 2013 को घर से साइकिल से अपने चाचा कन्हैया के उमरिया बाजार स्थित दुकान के लिए निकला था। शाम तक जब वह न तो दुकान पर पहुंचा और न ही घर लौटा तो चिंता बढ़ गई। पिता परमात्मा उस समय लखनऊ किसी काम से गए थे।
  भाई  कन्हैया ने भतीजे मनीष के गायब होने की उन्हें जानकारी दी तो जमीन तले से  पांव खिसक गया। पहले बेटे की काफी खोजबीन की। बाद में इस मामले में 19 सितंबर 2013 को छपरा मगर्वी और दुल्हापार गांव के रहने वाले दो लोगों के खिलाफ बेटे के अपहरण का केस दर्ज कराया। तभी से बेटे को पुलिस तलाश कर लाएंगी और दोषियों पर कार्रवाई करेंगी उम्मीद लगाए था। थाने से लेकर पुलिस उच्चाधिकारियों तक फरियाद किया,लेकिन कहीं से अभी तक न्याय नहीं मिला। छोटे बेटे को घर में निहारते है तो बड़े बेटे की याद खुद ब खुद ताजी हो जाती है। हर तरफ से हर थक कर कुछ समय पूर्व  भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी से मिल कर मामले को अवगत कराया और उनसे मामले को विधान सभा में उठाने की मांग किया। बेटे की अपहरण की कहानी सुनाते हुए पीड़ित मां- बाप की आंखे भर आई और बताए कि वह पुलिस से भले नाउम्मीद है,लेकिन बेटे के मिलने की उम्मीद अभी बरकरार है। इधर आईजी हरिराम शर्मा ने तीन साल से मनीष यादव के अपहरण की विवेचना लंबित होने से काफी नाराजगती जाहिर की। आईजी ने एसपी को निर्देश दिया कि विवेचना अथवा पर्यवेक्षण में बरती गई लापरवाही की जांच कराते हुए रिपोर्ट अविलंब प्रेषित करें।  इस मामले की विवेचना सबसे पहले धनघटा एसओ रहे शमशेर बहादुर सिंह ने की। उसके बाद मसकूर आलम, हंजल अंसारी, राकेश यादव,रुदल यादव,बृजेश यादव,बलराम मिश्र, अनिल सिंह,वृजेश सिंह यादव और अब वर्तमान एसओ आर डी मौर्या कर रहे है।
विज्ञापन

 जबकि विवेचना का पर्यवेक्षण पूर्व सीओ एम ए सिद्दीकी, अनिल सिरोही, अनिल वर्मा, आर के शर्मा, अनिल सिरोही और अब वर्तमान सीओ वीरेंद्र श्रीवास्तव के जरिए की जा रही है। चौकाने वाला तथ्य है कि इतने विवेचक रहे एसओ और पर्यवेक्षण करने वाले सीओ बदल गए,लेकिन अभी तक मनीष के अपहरण के केस का पर्दाफाश नहीं हो पाया।
 इंसेट
  किशोर मनीष के अपहरण मामले की विवेचना हो रही है। यह सच है कि तीन साल से अधिक समय गुजर गया और विवेचना लंबित है। किशोर का अभी तक पता नहीं चल पाया है। आईजी के निर्देश पर एएसपी अशोक वर्मा मामले की जांच कर रहे है। यदि विवेचना और पर्यवेक्षण में किसी स्तर पर किसी के जरिए लापरवाही बरती गई होगी तो जांच में यह बात सामने आ जाएगी। जांच रिपोर्ट आईजी को प्रेषित की जाएगी। विवेचक एसओ धनघटा को मामले की निष्पक्ष विवेचना किए जाने का निर्देश दिया गया है।
विज्ञापन

 - शैलेष कुमार पांडेय,एसपी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें