संतकबीरनगर। जिले में वाहनों के साइलेंसर मॉडिफाइड करके लोगों को दर्द दिया जा रहा है। खलीलाबाद शहर में तमाम नवयुवा मॉडिफाइड साइलेंसर लगा बुलेट गाड़ी खुलेआम चला रहे हैं। अचानक पटाखे की आवाज होने से दुर्घटना भी होती है। राह चलते बुजुर्ग की जहां दिल की धड़कन बढ़ जाती हैं वही मां की गोदी में जा रहे बच्चे भी सहम जाते हैं।
युवाओं में मॉडिफाइड साइलेंसर लगे वाहन का शौक दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। खलीलाबाद शहर में सुबह के समय लोगों के सैर के दौरान अथवा दिन हो या शाम युवाओं की टोली मॉडिफाइड साइलेंसर युक्त वाहन जन सामान्य को बेचैन कर देती है। अचानक वाहनों से निकलने वाली पटाखे व तड़तड़ाहट की आवाज लोगों के दिल की धड़कन बढ़ाकर बेचैन कर देती हैं। सबसे ज्यादा समस्या बुजुर्ग व बच्चों को होता है, तेज आवाज से जहां बच्चे सहम जाते हैं। वहीं मॉडिफाइड साइलेंसर से जहां ध्वनि प्रदूषण होता है, तो दिल की बीमारी से जूझ रहे बुजुर्ग के लिए यह आवाज जानलेवा हो सकता है।
अभिभावक बच्चों पर लगाए लगाम
तेज आवाज वाले वाहनों पर रोक लगना चाहिये। जो बच्चे ऐसे वाहन लेकर चलते हैं उनके अभिभावकों की भी जिम्मेदारी होती है कि अपने बच्चों को ऐसे वाहन चलाने पर लगाम लगाये। बुजुर्ग अभिभावकों को भी इससे समस्या पैदा होगा। ऐसे साइलेंसर युक्त वाहनों पर तत्काल रोक लगाया जाना चाहिये।
-हरिराम मौर्य, मड़या
गोली दगने की आवाज से अनहोनी की आशंका
दो पहिया वाहन में तेज आवाज लगा साइलेंसर चलाने का क्रेज युवाओं में लगातार बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। आवाज ऐसी होती है कि दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं। अचानक से गोली जैसी आवाज सुनने के बाद किसी अनहोनी की आशंका पैदा होता है। ऐसे वाहन को तत्काल प्रतिबंधित करना चाहिये।
-जय प्रकाश चौरसिया, बरईटोला
कोट
मानव के कान की सुनने की क्षमता-10 से 15 हर्ट्ज तक है। जबकि मोटर साइकिल की आवाज 80 से 84 डेसिबल तक मानक हैं परंतु साइलेंसर हटाने के बाद 200 से 250 डेसिबल तक हो जाता है। जिससे बेचैनी, चक्कर, बहरापन हो सकता है। इससे छोटे बच्चों के कान का पर्दा फट सकता है। साथ ही हार्ट के मरीजों को भी काफी परेशानी होती है।
-डॉ. आलोक सिन्हा, पूर्व जिला सर्विलांस अधिकारी
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मॉडिफाइड साइलेंसर की जांचकर कार्रवाई की गई है। इसके लिए फिर से यातायात पुलिस के साथ मिलकर जांच अभियान चलाया जाएगा। जिन वाहनों पर कंपनी के अतिरिक्त साइलेंसर लगा मिलेगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई किया जायेगा।
-प्रियंवदा सिंह, एआरटीओ