संतकबीरनगर। जिले में तीन अस्पतालों की लापरवाही की जांच एसडीएम और सीएमओ की टीम कर रही है, एक अस्पताल पर आंख के ऑपरेशन की लापरवाही है तो अन्य अस्पतालों में मरीज की मौत का मामला है। परिजनों समेत अन्य संस्थाओं ने इन अस्पतालों पर कार्रवाई की मांग को लेकर डीएम को पत्रक सौंपा था, जिसके बाद से इन पर जांच टीम का गठन किया गया है।
नेत्रालय के खिलाफ चल रही जांच
गोरखपुर जनपद के खरैला गीडा निवासी प्रमोद सिंह ने 10 फरवरी को डीएम को दिए शिकायती पत्र में कहा था कि 13 दिसंबर को शहर के अग्रवाल नेत्रालय में आंख का ऑपरेशन कराया। चिकित्सक ने गलत ढंग से एवं लापरवाही पूर्ण तरीके से ऑपरेशन कर लेंस लगा दिया।
जिससे उनकी आंख की रोशनी चली गई। जबकि उनके साथ दस लोग आंख का ऑपरेशन वही पर करवाए थे और सबकी आंख की रोशनी चली गई। चिकित्सक को दुबारा दिखाने पर दूसरे निजी अस्पताल में दिखाने की सलाह दी। पर्चा डॉक्टर ने अपने पास रख लिया और मांगने पर मारपीट कर अस्पताल से बाहर कर दिया।
निजी अस्पताल पर लापरवाही का आरोप, महिला की हुई थी मौत
शहर के एक निजी अस्पताल पर महिला के इलाज में लापरवाही का आरोप लगा है। आठ फरवरी को इसरावती देवी पत्नी रविन्द्र सिंह निवासी निवासी रसूलपुर को एडमिट हुई थी। जिसमें डाक्टरों द्वारा बताया गया कि बीपी, इन्फेक्शन तथा गैस की समस्या है।
इसरावती के परिजनों से कुल 58 हजार रुपये दवा और जांच के नाम पर ले लिया गया। जबकि उनको किसी परिजन से मुलाकात नहीं कराया गया। रात में एंबुलेंस बुलाकर डिस्चार्ज कर दिया गया और कहा गया कि गोरखपुर के एक निजी अस्पताल ले जाइए और डॉक्टर से बात हो गई है।
जब वहां लेकर पहुंचे तो वहां के अस्पताल ने मना कर दिया। दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया जहां पर डाॅक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। खलीलाबाद से गोरखपुर जाने के लिए निजी अस्पताल ने एम्बुलेंस के नाम पर 11000 रुपये आनलाइन पेमेंट लिया था। इस मामले में भाकियू ने डीएम को ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने अस्पताल का लाइसेंस रद्द करते हुए केस दर्ज कराने की मांग की थी।
उमरिया बाजार के निजी अस्पताल पर आरोप
10 फरवरी को रेखा पत्नी सुनील ग्राम व पोस्ट चपरापूर्वी तहसील धनघटा ने डीएम को शिकायती पत्र देकर कहा था कि सुनील कुमार को न्यू आर्या हाॅस्पिटल उमरिया बाजार में 10 मई 2024 को भर्ती कराया गया था। चिकित्सक के जरिए हार्निया एवं हाइड्रोसील के ऑपरेशन के दौरान 60 हजार रुपये का बिल बनाया।
लगभग 10 दिन हाॅस्पिटल में भर्ती के उपरांत हालत नाजुक होने पर रेफर होने पर दिल्ली में इलाज के दौरान दिनांक 29 दिसंबर को मौत हो गई। पीड़िता ने डीएम को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग है।
तीनों निजी हास्पिटल के खिलाफ जांच का निर्देश दिया गया है। इसमें सीएमओ, एसडीएमसदर और सीओ सदर को जांच अधिकारी नामित किया गया है। 15 दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी:
महेंद्र सिंह तंवर, डीएम