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Sant Kabir Nagar News: संजीवनी है सीपीआर... तुरंत बचाई जा सकती है जान

Sun, 18 Aug 2024 12:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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- हार्ट अटैक की संभावना को प्रशिक्षण देकर दूर कराते हैं डॉ. संतोष
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- अब तक खुद 12 लोगों को सीपीआर देकर बचा चुके हैं जान
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। अगर किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आ जाए तो सीपीआर देकर मरीज को चिकित्सीय सुविधा मिलने से पूर्व 60 फीसदी तक बचाया जा सकता है। बिजली का करंट लगने पर, पानी में डूबने पर और दम घुटने पर सीपीआर से तुरंत आराम पहुंचाया जा सकता है। जिला अस्पताल के बेहोशी के चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार त्रिपाठी हार्ट अटैक के मरीज को सीपीआर देने के तरीके को लेकर प्रशिक्षण देते हैं। वह शहर में जगह-जगह शिविर, जिला जेल व अन्य कार्यक्रमों में सीपीआर के जरिए जान बचाने की संभावना को बताते हैं। अब तक डॉ. संतोष ने 12 लोगों की सीपीआर देकर जान बचाई है।
बताते हैं कि सीपीआर एक तरह की प्राथमिक चिकित्सा यानी फर्स्ट एड है। जब किसी को सांस लेने में दिक्कत हो या सांस नहीं ले पा रहा हो और बेहोश जो जाए तो सीपीआर से उसकी जान तुरंत बचाई जा सकती है। साथ ही बिजली का करंट लगने, पानी में डूबने और दम घुटने पर सीपीआर से तुरंत आराम पहुंचाया जा सकता है। दिल का दौरा पड़ने पर पहले एक घंटे को गोल्डन ऑवर माना जाता है। इसी गोल्डन ऑवर में मरीज की जान बचाई जा सकती है। बताया कि कभी-कभी एंबुलेंस या मेडिकल सुविधा किसी कारण उपलब्ध नहीं होती है तो ऐसे समय में सीपीआर संजीवनी का काम करती है।
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खुद 12 लोगों को सीपीआर देकर बचाई है जान
डॉ. संतोष ने बताया कि अब तक खुद 12 लोगों को सीपीआर देकर जान बचाई है। बताया कि एक मरीज जिला अस्पताल में आया और उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, उसे तत्काल सीपीआर दिया तो वह सामान्य हो गया। उसके बाद इलाज शुरू किया गया, जिससे उसकी जान बच गई। बताया कि रोटरी क्लब, डॉक्टर एसोसिएशन, शिविर आदि में जाकर लोगों को सीपीआर का प्रशिक्षण देते हैं ताकि आपात स्थिति में लोग खुद सीपीआर देकर जान बचा सकें।
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सीपीआर देने का तरीका
डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि सीपीआर देने का तरीका बिलकुल आसान है। अगर कोई व्यक्ति सही तरीका जानता हो तो वह सीपीआर दे सकता है। सीपीआर देने के दौरान दोनों हाथों की मदद से मरीज के छाती के बीच में जोर और तेजी से दबाव देना होता है। हर एक दबाव के बाद छाती को वापस सामान्य स्थिति में आने दें, इससे मरीज की जान बचाई जा सकती है।
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