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एसओ व चौकी इंचार्ज पर केस दर्ज करने का कोर्ट का आदेश

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एसओ व चौकी इंचार्ज पर केस दर्ज करने का कोर्ट का आदेश
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साजिश के तहत आरोपियों को बचाने की कोशिश का आरोप
30 जून 2020 को पचपोखरी बाजार की हुई मारपीट व लूट की घटना के पीड़ित ने खटखटाया था अदालत का दरवाजा
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी जैनुद्दीन अंसारी ने एसओ दुधारा और चौकी इंचार्ज पचपोखरी के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है। दोनों पर साजिश रचकर आरोपियों को बचाने की कोशिश का आरोप है। उनके खिलाफ दुधारा क्षेत्र के बेला गांव निवासी अधिवक्ता परमात्मा प्रसाद ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
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अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार अधिवक्ता परमात्मा प्रसाद अनुसूचित जाति के हैं। 30 जून 2020 को शाम साढ़े पांच बजे पचपोखरी बाजार में पुलिस की मौजूदगी में उनके चचेरे भाई जयप्रकाश को छोटी से बात पर पचपोखरी निवासी छेदी यादव व अन्य ने जाति सूचक शब्द से अपमानित किया था। उसके साथ मारपीट की गई और जान माल की धमकी दी गई। सूचना पर वह बीच-बचाव करने मौके पर पहुंचे तो आरोपी ने सीने पर लाइसेंसी बंदूक रखकर सोने की चेन, अंगूठी व घड़ी छीन ली और जान माल की धमकी दी। इस संबंध में उन्होंने थानाध्यक्ष दुधारा श्रीप्रकाश यादव व चौकी प्रभारी पचपोखरी राम मिलन यादव को प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन उन्होंने रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया। पुलिस अधीक्षक ने क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद को मामले की जांच का आदेश दिया। इसके बाद अभियुक्तोें के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत हुआ। विवेचना के बाद न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया गया। परमातमा प्रसाद के वकील ने बताया कि इस मामले में वादी ने थानाध्यक्ष एवं चौकी प्रभारी के खिलाफ वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की थी। उनका कहना था कि मामले में साजिश रचकर आरोपियों को बचाया जा रहा है। सुनवाई नहीं होने पर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। साक्ष्य के रूप में घटना का ऑडियो वीडियो और सीडी न्यायालय में पेश की गई। इस पर न्यायालय ने एसओ व चौकी इंचार्ज के विरुद्ध आरोपियों को बचाने के आरोप में मुकदमा पंजीकृत कर 15 दिन के अंदर आख्या प्रस्तुत करने का आदेश दिया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि श्रीप्रकाश यादव थानाध्यक्ष दुधारा तथा राम मिलन यादव चौकी प्रभारी पचपोखरी ने साजिश कर व अनुचित लाभ प्राप्त कर आरोपियों को बचाने का प्रयास किया है, जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
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