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Sant Kabir Nagar News: गैर इरादतन हत्या के दोषी पिता- पुत्र को 10-10 साल की सजा

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संतकबीरनगर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम महेंद्र कुमार सिंह ने 13 साल पहले हुए गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी पाए जाने पर पिता- पुत्र को 10- 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दस- दस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर एक-एक वर्ष अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इसके साथ ही पीड़ित पत्नी को अर्थदंड की आधी रकम भी देने का आदेश दिया है।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी अभिमन्यु पाल ने बताया कि कोतवाली क्षेत्र के मगहर मोहल्ला शेरपुर के मोहम्मद रफी पुत्र मोहम्मद सफी ने एसपी को प्रार्थना पत्र दिया, जिसमें कहा कि उसके बहन- बहनोई के पट्टीदारों में पुरानी रंजिश चल रही है। उसकी बहन अपने निर्माणाधीन मकान के लिए रखी ईंटों को देख रही थी, तभी शकील, मुमताज, शाहजहां, गुलाम मोहम्मद, फिरोज थाना मेंहदावल मोहल्ला बारागद्दी गोल बनाकर लाठी-डंडा, भाला से लैस होकर अपशब्द कहते हुए उसकी बहन अलीमुन्निशा पत्नी मकबूल अहमद तथा मकबूल अहमद मोहल्ला बारागद्दी को जान से मार डालने की नियत से छह अप्रैल 2010 को प्राणघातक हमला कर दिया।
उसकी बहन ने जान बचाने के लिए अपने कमरे में घुसने का प्रयास किया तो आरोपी शाहजहां ने बाल पकड़कर जमीन पर पटक दिया तथा शेष लोग हमला कर मारने लगे। आरोपी उसे मार ही रहे थे कि तभी उसके पति शोर सुनकर आए तो उपरोक्त लोगों ने उन पर भी हमला बोल दिया। लाठियों व सब्बल से मारने पीटने लगे। उसके पति के सिर से बहुत खून बहने लगा। शरीर में बहुत चोटें आईं और वह बेहोश हो गए।
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डॉक्टरों ने मकबूल की हालत चिंताजनक देखकर मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान मकबूल की मृत्यु हो गई। मेंहदावल में मुकदमा पंजीकृत हुआ। विवेचना के पश्चात आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। आरोपी शकील, मुमताज, शाहजहां की पत्रावली अलग की गई। आरोपी गुलाम मोहम्मद, फिरोज अहमद की पत्रावली सत्र न्यायालय में विचारण के लिए सुपुर्द की गई। इस दौरान विचारण अभियोजन की तरफ से दस गवाहों की गवाही हुई। मृतक मकबूल अहमद की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित 14 अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
अभियोजन की तरफ से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी अभिमन्यु पाल ने कोर्ट में कहा कि अपराध गंभीर है, आजीवन कारावास से दंडित किए जाने का प्रावधान है। आरोपियों ने बलवा करते हुए घातक हथियार से सुसज्जित होकर आपराधिक मानव वध का जघन्य अपराध किया है। मामले के तथ्य एवं परिस्थितियों तथा पक्षों की बहस को सुनने के बाद दोष सिद्ध पाए गए कोर्ट ने गुलाम मोहम्मद और उनके फिरोज अहमद को दस-दस साल की सजा सुनाई।
इसके साथ ही दस-दस हजार रुपये अर्थ दंड से भी दंडित किया। अर्थ दंड अदा न करने पर एक- एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इसके साथ ही अर्थ दंड की आधी रकम मृतका की पत्नि अलीमुन्निषां को भी देने का आदेश दिया है।
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