संतकबीरनगर। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या एक रमेश दूबे की कोर्ट ने प्रधानी चुनाव में नियम के खिलाफ भीड़ एकत्रित करते हुए लोक सेवक के खिलाफ बल प्रयोग करते हुए पीटने व दंगा करने तथा डकैती डालने के मामले में आरोपी बनाए गए 14 लोगों को विचारण के उपरांत संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। यह भी आरोप है कि घटना में तत्कालीन क्षेत्राधिकारी धनघटा और पुलिसकर्मियों को भी चोटें पहुंचाई थी।
बचाव पक्ष के अनुसार थाना महुली पर 22 अक्तूबर 2010 को प्रार्थना पत्र दिया गया कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के तृतीय चरण में कुछ प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ इकट्ठा होकर वाद-विवाद मारपीट, अव्यवस्था पैदा करके शांति पूर्ण मतदान में बाधक बन रहे हैं। एसडीएम धनघटा के साथ दो बजे दिन में पहुंचे। वहां पर लोग एकराय होकर पीएसी की एक राइफल छीनने के साथ ही पुलिस पर ईंट फेंकने लगे। पुलिस की एसएलआर मैगजीन व उसमें भरे 10 कारतूस छीनकर पथराव करते हुए घटनास्थल से भागे व सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाते हुए चोट पहुंचाया।
मौके पर पथराव करने वालों का नाम पता किया तो उसमें रामनाथ चौधरी समेत 17 नामजद व अन्य अज्ञात एक दर्जन व्यक्ति शामिल थे। ईंट फेंकने से एसआई गिरधर प्रसाद, वासुदेव राना, राम दरस सिंह, जय सिंह व कांस्टेबल प्रदीप को चोटें आईं। अतिरिक्त पुलिस बल की व्यवस्था कर चुनाव संपन्न कराया गया और थाना महुली में केस दर्ज हुआ। विवेचना के उपरांत 15 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। आरोपियों ने आरोप से इन्कार करते हुए विचारण की मांग किया। विचारण के दौरान आरोपी इंद्रजीत की मृत्यु हो गई।
अभियोजन आरोपों को साबित करने के लिए तत्कालीन सीओ धनघटा इनायतुल्लाह खान समेत अन्य को परीक्षित कराया। अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या एक रमेश दूबे की कोर्ट ने पक्षों की बहस सुनने के उपरांत कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप को साबित करने में असफल रहा। थाना महुली क्षेत्र के 14 आरोपियों रामनाथ चौधरी, गणेश, धर्मेंद्र, कुमारी सोनमती, श्रीमती मनोरमा, श्रीमती नंदिनी, हरिश्चंद्र, बेचन, हपई, धर्मजीत, चंद्रजीत, अरविन्द, लल्लन यादव, सत्य प्रकाश को संदेह का लाभ पाते हुए दोष मुक्त कर दिया।