- एसडीएम के निर्देश पर मंगलवार को होगा महंत का चयन
- पुलिस ने महंत के दावेदार को मंदिर में घुसने पर पाबंदी लगाई
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। क्षेत्र के ग्राम बेलडुहा में स्थित श्रीराम वैदेही मंदिर का महंत पद के लिए दो पक्षों में तनाव बढ़ गया। सूचना पर पुलिस पहुंच गई। दोनों पक्षों को थाने पर तलब किया। थाने पर दोनों लोग जो खुद को महंत होने की बात कह रहे है। दोनों पक्षों ने अपनी बात पुलिस के समक्ष रखी। एसओ महुली ने निस्तारण के लिए एसडीएम खलीलाबाद से बात की। जिसमें मंगलवार को एसडीएम की मौजूदगी में ग्रामीण नए महंत का चयन करेंगे। पुलिस ने इस दौरान दोनो महंत के दावेदार को मंदिर में घुसने पर पाबंदी लगा दी है।
बेल्तुहा गांव के अंकित पाल ने बताया कि गांव में स्थित श्री राम वैदेही मंदिर के महंत श्रीराम बिहारी दास के कुल से हैं। स्वर्गीय श्रीराम बिहारी दास का स्वर्गवास दो जुलाई को हुआ। 14 जुलाई को तेरहवीं के दिन अयोध्या धाम से पहुंचे साधुओं ने अमित दास को महंत की घोषणा कर दी थी। जबकि ग्रामीणों के अनुसार स्वर्गवासी महंत का अयोध्या धाम के किसी मठ से कोई संबंध नहीं था। न ही मंदिर का कोई संबंध है।
गलत तरीके से महंत को कार्यभार दिया गया है। अंकित पाल के अनुसार स्वर्गवासी महंत श्रीराम बिहारी दास की सेवा काफी वर्षो से बालक दास जी महाराज करते आ रहे थे। जिन्हें ही महंत बनाने के लिए क्षेत्रवासियों की मंशा है। रविवार को मंदिर परिसर पर महंत के चयन के लिए कोडरा, कोल्हुआ और बेल्डुहा आदि गांव के ग्रामीण इकट्ठा हुए थे।
इसी दौरान दूसरे पक्ष से अमित दास के साथ उनके पक्ष के लोग पहुंच गए। एतराज करने लगे। सूचना पर पुलिस पहुंच गई। थाने पर दोनो पक्षों को तलब किया। घंटों तक दोनों महंत के दावेदार और उनके समर्थक थाने पर डटे रहे। इस दौरान दोनों पक्ष किसी तरह का अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सके।
इंस्पेक्टर राम कृष्ण मिश्र ने एसडीएम खलीलाबाद से टेलीफोनिक वार्ता करके प्रकरण की जानकारी दी। वार्ता के बाद यह निर्णय हुआ कि मंगलवार को तहसील प्रशासन की मौजूदगी में गांव के ग्रामीण नए महंत को चुनकर उनकी ताजपोशी करेंगे।
बोले दावेदार
स्व. महंत कभी-कभी अयोध्या धाम पहुंचकर मुझ से मुलाकात करते थे। जब कभी हम क्षेत्र में आते तो उनके मंदिर पर पहुंचकर आशीर्वाद लेते थे। अयोध्या के साधु-सन्यासियों ने खुद पहुंचकर उन्हें महंत बनाया है। जिसके लिए वह ही मंदिर के असली महंत हैं। पड़ोसी गांव के ग्रामीण भी उनके पक्ष में है।
- अमित दास
बाल्यावस्था से ही स्व. महंत की सेवा करता आ रहा हूं। महंत के सानिध्य में रखकर शिक्षा दीक्षा भी ग्रहण किया। लोगों की मंशा है कि वे ही महंत बने। मंदिर का अयोध्या से किसी तरह का संपर्क नही है। तेरहवीं के दिन गलत तरीके से अमित दास को कुछ बाहरी लोग द्वारा महंत बना दिया गया। जिसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश भी है। मैं ही असली महंत बनने का हकदार हूं।
- बाबा बालक दास